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बेलआउट को लेकर सरकार असमंजस में

सरकार सत्यम कंप्यूटर्स के घपले के बाद हाारो कर्मचारियों और लाखों शेयरधारकों के हितों को देखते हुये कंपनी को पटरी पर लाने की कवायद में जुट गई है लेकिन निकट भविष्य में किसी वित्तीय पैकेा को लेकर असमंजस के दौर से गुजर रही है। अगर कंपनी की वित्तीय स्थिति अपने आप सुधरती नजर आई तो यह पैकेा टल भी सकता है। इस बात के संकेत कॉरपोरट अफेयर्स मंत्री प्रेमचंद गुप्ता ने दिये हैं। वहीं दूसरी ओर सत्यम बोर्ड में नये निदेशकों को नियुक्त करने की कवायद शुरू हो गई है। प्राइसवाटर हाउस ने भी अपनी रिपोर्ट को तकनीकी रूप से अविश्वसनीय घोषित करते हुये फिर से इस बात को दोहराया है कि उसने कंपनी की ओर से पेश साक्ष्यों के आधार पर ही ऑडिट किया है। कॉरपोरट अफेयर्स मंत्री गुप्ता ने संवाददाताओं से बात करते हुये कहा कि माहौल को ठंडा होने दीजिये। पहले कंपनी की स्थिति में थोड़ा सुधार हो, इसके बाद अगर सरकार पैकेा पर विचार करती है तो उसकी जानकारी सभी को मिलेगी ही। उनके इस बयान से इस बात के कयास लगाये जा रहे हैं कि सरकार वित्तीय पैकेा को टाल भी सकती है। ध्यान रहे कि नवगठित सत्यम बोर्ड के अध्यक्ष दीपक पारख पहले ही यह बात कह चुके हैं कि सरकारी पैकेा कंपनी के लिए आखिरी विकल्प होगा। उन्होंने कहा कि सरकार कंपनी के कर्मचारियों और शेयरधारकों के हितों को लेकर चिंतित है। फिलहाल केपीएमजी और डिलॉयट को कंपनी का ऑडीटर नियुक्त नहीं किया गया है बल्कि उन्हें ऑडिट संबंधी गड़बड़ियों को दूर कर सही रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। घपले में राजनीतिक हाथ होने संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा कि कंपनी अधिनियम की धारा 20ए के आधार पर यह मामला संज्ञान में लिया गया है और सीरियस फ्रॉड ऑफिस इसकी जांच कर रहा है। जांच में सारी बातों का पता लगेगा। एल एंड टी चेयरमैन की ओर से प्रधानमंत्री को सत्यम के विलय संबंधी प्रस्ताव के बार में उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। रिलायंस एडीएजी के चेयरमैन अनिल अंबानी के साथ मुलाकात को उन्होंने सामान्य मुलाकात बताया। वैसे माना जा रहा है कि इस मुलाकात में अंबानी ने उन्हें सलाह दी है कि बड़ी कंपनियों के ऑडिट मामले में सेबी की ओर से ऑडीटरों को नियुक्त करने का प्रस्ताव ठीक है लेकिन इस पैनल में उच्च स्तरीय ऑडीटर शामिल किये जाएं और एक कंपनी की ऑडिट में लगे ऑडीटरों को दूसरी कंपनी में न लगाया जाये ताकि कंपनियों के दस्तावेजों की गोपनीयता बनी रहे। दूसरी ओर सत्यम की आडीटर कंपनी पीडब्ल्यूसी ने कंपनी बोर्ड को पत्र भेजकर जानकारी दी है कि कंपनी चेयरमैन रामलिंगा राजू के घपले को स्वीकार करने संबंधी पत्र के बाद अब उसकी रिपोर्ट को अविश्वसीय मान लिया जाना चाहिये। यही नहीं, अमेरिकी जांच कानून के दायर में कंपनी बोर्ड को स्वतंत्र जांच शुरू करनी चाहिये और वह इसमें पूरा सहयोग देने के लिए तैयार है। कंपनी ने यह बात फिर से दोहराई है कि ऑडिट के समय कंपनी प्रशासन ने पर्याप्त प्रमाण पेश किये थे जिनके आधार पर ऑडिट किया गया। इन प्रमाणों के आधार पर ऑडिट मानकों के बिलकुल ही अनुरूप है। इस पत्र की प्रतिलिपि सेबी और आरबीआई समेत विभिन्न नियामक एजेंसियों को भी दी गई है।

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