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दो-चार दिनों के लिए होती है एसी कार्यकारी व्यवस्था

संविधान विशेषज्ञ डा. सुभाष कश्यप ने कहा कि झारखंड में राजनीतिक संकट को दूर करने के लिए राज्यपाल को अविलंब पहल करनी चाहिए। संविधान ने उन्हें मुख्यमंत्री नियुक्त करने की जिम्मेवारी दी है। झारखंड में अभी शिबू सोरन की कार्यकारी सरकार है। कार्यकारी व्यवस्था लंबे समय तक बनाये रखने का कोई औचित्य नहीं है। राज्यपाल को विवाद से बचने के लिए विधानसभा को अपना नया नेता चुनने की जिम्मेवारी सौंप देनी चाहिए। यही संवैधानिक प्रावधान है। वह झारखंड के वर्तमान राजनीतिक संकट पर हिन्दुस्तान से बात कर रहे थे।ड्ढr उन्होंने हुए कहा कि इस प्रक्रिया से राज्यपाल न सिर्फ विवाद से बचेंगे, बल्कि हेड काउंटिंग से भी बच जायेंगे। अब उन्हें हेड काउंटिंग के चक्कर में पड़ना भी नहीं चाहिए। इसके लिए राज्यपाल सदन को यह संदेश भिजवाएं कि सदन अपना नेता चुनकर उन्हें जानकारी दे दे। सदन के निर्वाचित नेता को राज्यपाल मुख्यमंत्री नियुक्त कर दें। क्योंकि जिस किसी व्यक्ित को वह मुख्यमंत्री नियुक्त करंगे, उसे सदन का विश्वास हासिल करने के लिए विधानसभा में जाना होगा। राज्यपाल को आश्वस्त होने के लिए इसके पहले उसके समर्थक विधायकों की परड भी करानी पड़ेगी। डा. कश्यप का कहना है कि कार्यकारी व्यवस्था दो-चार दिनों के लिए ही होती है। राज्यपाल जब आश्वस्त हो जायें कि राज्य में कोई वैकल्पिक सरकार नहीं बन पायेगी, तब उन्हें केंद्र को रिपोर्ट भेजकर आगे कार्रवाई करनी चाहिए।

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