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एक बर्थडे जो हैप्पी नहीं रहा

मौका भले ही यूपी की मुख्यमंत्री मायावती के जन्मदिन का था, बसपा समेत सभी दलों ने शक्ित प्रदर्शन किया। यह एक तरह से लोकसभा चुनाव की तैयारी का रिहर्सल था। भले ही बाहर भी कुछ जगहों पर प्रदर्शन हुए, असली रणभूमि यूपी थी। प्रदर्शन के दौरान दिख भी रहा था कि कौन सत्ता में है और कौन विपक्ष में। बसपा ने ‘विपक्षी दल धिक्कार दिवस’ का आह्वान किया था। इस मौके पर नोएडा में पंडाल आदि लगाए थे। कलेक्ट्रेट के पास पुलिस वालों ने भी मिठाइयां बांटी। इतनी सुविधाओं के बावजूद यहां कम लोग आए। नोएडा के अफसरों ने माया के गांव बादलपुर में भी व्यापक बंदोबस्त किए थे। दूसरी तरफ विरोधी दलों के प्रदर्शन पर लगभग हर जगह लाठियां भांजी गई और लोगों को खदेड़ा गया। नोएडा, गाजियाबाद में तो ऐसा हुआ ही, लखनऊ और यूपी के अन्य इलाकों में भी यही दृश्य दिखा। वैसे, ये दृश्य नए नहीं थे। पिछले सपा शासन में यही दृश्य बसपा समेत तमाम विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं के साथ होता था। हां, ओरैया में इांीनियर मनोज गुप्ता की हत्या के पीछे माया जन्मदिन के नाम पर वसूली के आरोप के कारण इस बार विपक्ष के पास ठोस कारण था। वैसे, माया ने इस आरोप को गुरुवार को भी गलत कहा। उधर माया जन्मदिन पर बसपा की तिजोरी हर साल भरती जाती है। लेकिन पार्टी इसकी घोषणा नहीं करती जबकि कानूनन 20 हाार रुपये से अधिक का दान पाने वाले दलों को चुनाव आयोग में बताना अनिवार्य है। तब ही उन्हें आयकर छूट का प्रावधान है। बसपा के साथ ही 21 बड़े दल हैं जो ऐसा नहीं कर रहे। कांग्रेस ने भी 2006-07 का रिटर्न नहीं भरा है।

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