अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बेसहाराओं को दिए पाँच-पाँच हचाार

थोड़ी सी दुश्वारियों से टूट कर नकारात्मक राह पर चलने वालों के लिए अनीसा नाीर हो सकती है! बुाुर्ग माँ, विधवा बहन, उसकी नन्ही-नन्ही दो बेटियाँ..और खुद की एक बेटी!ोिन्हें पालकर दुनियादार बनाने काोरियामास (आय का साधन) है कागा के ‘लिफाफों का निर्माण!’ बसपाइयों नेोब उसे पाँच हाार रुपए दिए, तब उसकी खुशी देख लगा मानो, अरमानों को पर लग गए हैं। ख्वाब हकीकत में बदल गया हो। सिर्फ अनीसा नहीं बल्कि रनू रावत, नफीसा, लल्लूलाल ौसे तकरीबन 10 असहाय नागरिकों को गुरुवार कोोब कलेक्ट्रेट में मुख्यमंत्री मायावती केोन्मदिन पर पाँच-पाँच हाार रुपए की मदद दी गई, तब इन सभी के चेहर खिले-खिले नार आए।ड्ढr बशीरतगां निवासी 32 वर्षीय अनीसा विधवा हैं। उनकी एक बेटी भी है। विधवा बहन और उसकी दो बेटियों काोिम्मा भी अनीसा पर ही है,ोिनकेोीवन यापन के लिए वह कागा के लिफाफे बनाती है, मगर तीनों बेटियों को वह पढ़ाना चाहती हैं। आर्थिक दुश्वारियाँ इस राह चलने नहीं दे रहीं थीं। वह नहींोानती किस की सिफारिश पर उसे मुख्यमंत्री केोन्मदिन पर पाँच हाार की मदद देने का फैसला हुआ लेकिन गुरुवारोब कबीना मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी व अखिलेश दास के हाथों पाँच हाार रुपए का लिफाफा थमाया गया तो वह चिहुँक उठी। बोली-‘भूखे रह लेंगे लेकिन इस रुपए को सिर्फ बेटियों की पढ़ाई पर ही खर्च करंगे।’ड्ढr कई लोगों ने उसकेोबे को सलाम कहा..मकबूलगां की निवासी रनू रावत का पति विायरावत मानसिक रोगी है, ऐसे में दो बेटियों को पढ़ाने-लिखाने और पति का इलाा कराने के लिए वह तुरपाई-कढ़ाई का कार्य करती है। गुनी है, सो चार पैसे कमा लेती है। मुख्यमंत्री केोन्मदिन पर आई पाँच हाार की यह मदद उसके दु:ख हरने में कारगार होगी, सो वह भी दुआ करंगी कि मायावती प्रधानमंत्री बनें।ड्ढr डालीगां की निवासी नफीसाबानो मदद की इस राशि से अपने बीमारमाता-पिता का इलाा कराएँगी। वह भी मायावती के दीर्घायु होने की कामना करती हैं। लल्लूलाल व अन्य लोग भी आर्थिक मदद से खासे गदगद नार आए। इन लोगों की मदद के विपरीत कई लोगों ने यह भी कहा कि अगर समाा कल्याण विभाग से मिलने वाली वृद्धावस्था, विकलांग और विधवा पेंशन की सही ढंग से वितरित कीोाने लगे तो शायद..मादूरों-माबूर बेहाली से बचोाएँ।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: बेसहाराओं को दिए पाँच-पाँच हचाार