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रिम्स फिर राम भरोसे

रिम्स के जूनियर डॉक्टरों के आधी रात से हड़ताल पर जाने के साथ ही इमरोंसी वार्ड चिकित्सक विहीन हो गये। चिकित्सकीय व्यवस्था पंगु हो गयी। पूर अस्पताल में इक्का-दुक्का डॉक्टर ही नजर आये। सबसे बुरी स्थिति गंभीर मरीाों की रही। इनके परिजनों ने रात आंखों में काटी।ड्ढr न्यूरो वार्ड में भर्ती रवींद्र कुमार ने बताया कि रात 12 बजे के बाद कोई चिकित्सक उसे देखने नहीं आया। गंभीर रूप से बीमार रवींद्र काफी गरीब है और अपना इलाज निजी अस्पतालों में कराने में असमर्थ है। वह कहता है कि अब जो भगवान की मर्जी होगी, वही होगा। मेडिसीन विभाग में भरती महेश गंभीर रूप से बीमार है। उसने कहा कि पैसा नहीं होने के कारण वह दवा नहीं खरीद पा रहा, ऐसे में बाहर कैसे इलाज करायेगा। गिरिडीह निवासी नकुरी महतो काफी गरीब है। बताता है कि उसने अपने आप को भगवान के ऊपर छोड़ दिया है। ललगुटवा निवासी जनक लोहरा असमंजस में है। वह तय नहीं कर पा रहा कि रिम्स में रहे या फिर चला जाये। वह सुबह तक इंतजार करेगा।ड्ढr परिस्थिति समझने को तैयार नहीं जूनियर डॉक्टर : डॉ प्रदीपड्ढr स्वास्थ्य सचिव डॉ प्रदीप कुमार ने कहा है कि डॉक्टर परिस्थिति को समझने को तैयार नहीं हैं। उनकी मांगों पर कार्रवाई हो रही है। सरकार के नहीं रहने के कारण वित्त संबंधी मामलों पर निर्णय लेने में दिक्कत हो रही है। बाउंड्री वॉल बन रही है। इसके बाद भी हड़ताल पर जाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि गुरुवार तीन बजे उन्होंने रिम्स आने की बात कही थी। हालांकि आवश्यक काम पड़ जाने के कारण वे नहीं जा सके। हड़ताल से निपटने के लिए सरकार कार्रवाई करगी। डॉक्टरों की पोस्टिंग यहां की जायेगी।ड्ढr पिछली हड़ताल ने 27 को लीला था : रिम्स के जूनियर डॉक्टर एक बार फिर से हड़ताल पर चले गये हैं। ऐसे में यहां बार भी गरीब मरीाों की जान फिर आफत में है। पिछली बार चली छह दिन की हड़ताल में 27 मरीाों की जान गयी थी। इस अवधि में करीब 700 मरीा पलायन कर गये।

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