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जेल की प्राचीर से बड़ा व्यक्ितत्व

देश के विख्यात चिकित्सक, समाजसेवी और मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. विनायक सेन को माओवादी होने के संदेह में मई 2007 से ही छत्तीसगढ़ की जेल में कैद कर रखा गया है। जेल में बंद कर विनायक जसी सामाजिक विभूति के मनोबल को तोड़ा नहीं जा सकता। दक्षिण अफ्रीका की जेल में कई वर्षो तक कैद कर रखकर क्या नेल्सन मंडेला के मनोबल को तोड़ा जा सका था या कि उनहें ध्येयच्युत ही किया जा सका था? डॉ. विनायक सेन भारत के उन चुनिंदा लोगों में हैं जिनके प्रति मेर हृदय में अगाध सम्मान है और उसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि वे गत पचीस वर्षो से छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की नि:स्वार्थ सेवा-सुश्रुषा कर रहे हैं। आदिवासी सदियों से तीव्र रक्तशोषित और उत्पीड़ित हैं इसीलिए उनके बीच मैंने भी काम किया, आज भी कर रही हूं और जो भी लोग उनके बीच काम करते हैं, उनके साथ स्वाभाविक रूप में मेरा रागात्मक संबंध कायम हो जाता है। एक चिकित्सक की भूमिका के अलावा आदिवासियों को गरीबी व कुपोषण से मुक्त करने की दिशा में विनायक ने अत्यंत उल्लेखनीय कार्य किए हैं। समाजसेवी विनायक ने जरूरत पड़ने पर संघर्ष भी किया। सलवा जुडूम की आलोचना कर और छत्तीसगढ़ के 640 गांवों के लोगों के विस्थापन का तीव्र प्रतिवाद कर विनायक सेन छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार की आंखों की किरकिरी बन गए थे। इसीलिए वहां की सरकार ने उन पर माओवादी होने का आरोप लगाया और कहा कि चिकित्सक तो वे नाम के वास्ते हैं। छत्तीसगढ़ शासन कहता है कि किसी पीयूष गुहा ने छत्तीसगढ़ पुलिस को पूछताछ के दौरान बताया कि नक्सलियों से संबंधित तीन पत्र व पत्रिकाएं उसे डॉ. विनायक सेन ने दी थी। ये पत्र व पत्रिकाएं पीयूष के यहां से छत्तीसगढ़ पुलिस ने बरामद की थीं। और यह भी कहा गया कि विनायक को भी वे पत्रादि जेल में बंद नारायण सान्याल ने दी थी। नारायण सान्याल माओवादी है। वह सीपीआई (माओवादी) का सदस्य है। विनायक ने नारायण सान्याल के साथ 33 बार मुलाकात कीं और उनसे पत्र लेकर अन्यत्र पहुंचाए और इस तरह माओवादियों की मदद कर करोड़ों रुपए के जान-माल का उन्होंने नुकसान किया। इस आरोप के साथ ही विनायक को गिरफ्तार कर उनके घर की तलाशी ली गई और दावा किया गया कि तलाशी के दौरान आपत्तिजनक साहित्य मिला। उसे पुलिस ने बरामद कर लिया। डॉ. विनायक सेन के विरुद्ध गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम-संशोधित अधिनियम 2004 की धारा 3, 10 (ए), 20, 21, 38 और 3भारतीय दंड विधान के अनुच्छेद 120 बी, 121 ए और 124 ए और छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम 2005 के अनुच्छेद 2 बी, डी, 8 (1), (2), (3) और (5) के तहत आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं। मामले की सुनवाई के दौरान कुल 87 में से 38 गवाहों की गवाही ली जा चुकी है। विनायक के मामले में छत्तीसगढ़ सरकार ने जो आरोपपत्र दाखिल किए हैं, उसके बार में तथ्य यह है कि पीयूष गुहा का विनायक से पत्र मिलने से संबंधित कोई वक्तव्य आरोपपत्र में नहीं है। अब तक की गवाही में किसी ने विनायक-पीयूष मुलाकात की पुष्टि नहीं की है। नारायण सान्याल से जेल में हर बार विनायक ने पीयूसीएल के पदाधिकारी के नाते भेंट की। किसी बरामद कागजात से विनायक के माओवादी संगठन से सम्बद्ध होने का पता नहीं चलता। नारायण सान्याल की तरफ से विनायक को भेजे गए किसी पत्र का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है। मुझे ताज्जुब है कि इन तथ्यों के बावजूद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने विनायक को जमानत नहीं दी क्योंकि राज्य सरकार ने जमानत देने का तीव्र विरोध किया था। छत्तीसगढ़ की जनविरोधी व सांप्रदायिक सरकार ने उस शख्स को अनिश्चितकाल तक जेल में कैद रखने का षड्यंत्र रचा है जो गरीबी-अरण्यजीवियों का सच्चा सेवक है, जिसे देश-विदेश की कई संस्थाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया है। पाल हरिसन अवार्ड और आर.आर. खेतान स्वर्ण पदक पानेवाले विनायक सेन को 140 देशों की अंतरराष्ट्रीय ज्यूरी ने स्वास्थ्य व मानवाधिकारों के लिए जोनेथम मन अवार्ड के लिए 2008 में चुना तो अमर्त्य सेन समेत 26 नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने भारत सरकार व छत्तीसगढ़ राज्य सरकार से विनायक को व्यक्ितगत रूप से उपस्थित होकर पुरस्कार लेने-देने की अनुमति देने का आग्रह किया, पर सरकारों ने इसे नहीं माना। जबकि नोबेल विजेताओं ने गारंटी दी थी कि पुरस्कार लेने के बाद विनायक जेल लौट जाएंगे। विनायक की विद्वान पत्नी डॉ. इलिना सेन से अभी हाल मैं मिलने गई तो उसका संघर्ष देख मन भर आया। इलिना ने मुझसे कहा- आदिवासियों ने बहुत अत्याचार व दु:ख सहे हैं, उसी तरह विनायक सह रहे हैं। विनायक की मां अनुसूइया का भी यही कहना था। लेकिन मैं इलिना व अनुसूइया से यह कहना चाहती हूं कि हम विनायक पर जुल्म नहीं होने देंगे। उनकी रिहाई के लिए देशभर में आंदोलन चल रहा है। कोलकाता में तो हम लोगों ने जुलूस निकाले, सभाएं कीं अब बड़ी लड़ाई की तैयारी हम कर रहे हैं। मैं चाहती हूं हर तरफ से विनायक की रिहाई की मांग उठे। और छत्तीसगढ़ सरकार को बोध कराया जाए कि जेल की प्राचीर से विनायक का व्यक्ितत्व बड़ा है।ं

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