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अब भाचापा की चिंता-कैसे बचाएँ लखनऊ की सीट

सांय दत्त के लखनऊ से चुनाव लड़ने की राह में कई रोड़े हैं। कई अगर-मगर है, लेकिन उनके एलान के बाद से ही लखनऊ लोकसभा सीट इस बार भी चर्चा के केन्द्र में आ गई है। यदि सांय चुनाव लड़े तो इस सीट में लड़ाई बहुत रोचक होगी। इस एलान ने विपक्षी दलों विशेष कर भाापा के चेहर पर तनाव ला दिया है। पिछले 18 सालों से यह सीट भाापा के कबे में है।ड्ढr सांय दत्त के लखनऊ से चुनाव लड़ने कीोब सपा ने घोषणा की थी तब यह सवाल उठ रहे थे कि चुनाव लड़ने के लिए सांय की सहमति है या नहीं। यही नहीं अभी सबसे बड़ा सवाल यह है कि नवाोत सिंह सिद्धू की तरह सांय दत्त को सुप्रीम कोर्ट चुनाव लड़ने की क्षाात देगा या नहीं। तीसरा सवाल सांय दत्त के इस एलान से पैदा हुआ है कि यदि अटल बिहारी वाापेयी मैदान में उतर तो वह चुनाव नहीं लड़ेंगे। लेकिन इन तमाम अगर-मगर के बीच भाापा परशानी में फँस गई है। वह अपने शीर्ष नेता अटल बिहारी वाापेयी की इस सीट को उनकी अनुपस्थिति में भी गँवाना नहीं चाहती। लखनऊ सीट को लेकर भाापा नेतृत्व कई बैठकें कर चुका है। पार्टी सूत्रों के अनुसार श्री वाापेयी से एक बार फिर लखनऊ से चुनाव लड़ने का अनुरोध किया गया था। पार्टी नेताओं ने उनसे कहा था कि वह सिर्फ नामांकन भर आएँ। इसके बाद चुनाव प्रचार में नोाएँ। अटल ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया। नेतृत्व के सामने अब दो विकल्प हैं। या तो लखनऊ के ही किसी नेता को टिकट दे दियाोाएँ या किसी अन्य स्टार को चुनाव लड़ने के लिए लखनऊ ोाोाए। एक तरफ पार्टी के कुछ नेता चाहते हैं कि लखनऊ के ही स्थानीय नेता को ही मैदान में उतार दियाोाए। इसमें पूर्व मंत्री लालाी टण्डन का नाम सबसे आगे चल रहा है। श्री टण्डन शुक्रवार को दिल्ली गए थे। वहाँ उन्होंने भाापा के कई बड़े नेताओं से लखनऊ सीट पर बातचीत की। पार्टी के कुछ बड़े नेता चाहते हैं कि किसी बड़े नेता को चुनाव लड़ने लखनऊ ोाोाएँ। 18ोनवरी से केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक होनेोा रही है। पार्टी को लखनऊ सीट के लिए प्रत्याशी तीन-चार दिन में ही तय करना है। इसी के चलते भाापा में गतिविधियाँ और तेा हो गई हैं। भाापा के कुछ नेताओं ने नेतृत्व को सलाह दी थी कि लखनऊ सीट से शत्रुघ्न सिन्हा को चुनाव लड़वायाोाएँ। लेकिन शुक्रवार को मुंबई में श्री सिन्हा सांय दत्त कोोीत का आशीर्वाद दे आए। इससे भाापा की योना धरी की धरी रह गई।

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