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निराशा

निराशा इस बार भी निराशा हाथ लगी। बात विकास यात्रा की निकली। भाई लोगों ने पूछा-मीडियावालों के लिए क्या रहेगा। राजा ने विभाग के अफसर की ओर इशारा किया। अफसर बोले-आप लोगों के लिए दो ही इंतजाम न करना है। फिर जिज्ञासा हुई-दूसरा इंतजाम क्या है। बताया गया एक है रहने का और दूसरा समाचार भेजने का इंतजाम। भाई लोगों के मुंह से निकला बाकी का इंतजाम? जवाब राजा की ओर से मिला-बाकी इंतजाम आपको खुद करना होगा। सरकार इसमें आप लोगों की कोई मदद नहीं कर सकती है। ठीक भी है।ड्ढr ड्ढr चादरड्ढr लोगों की नजर राजा के बंगले पर लगती है। इधर सत्ताधारी दल के एक विधायक की नजर चचा की चादर पर लग गई। उस दिन अड्डे पर बैठे थे कि भोला चा ने चादर का गुणगान शुरू कर दिया। बताने लगे कि मामूली चादर नहीं है। पूर डेढ़ लाख रुपये की है। चाचा टायलेट गए। विधायकाी ने चादर समेट ली। जिद करने लगे कि गिफ्ट कर दीजिए। मामला सभापति तक पहुंचा। बुजुर्ग सभापति ने नियमन दिया-दे दीजिए न। गिफ्ट की ही तो है। चाचा ने असली बात बताई-एक महारानी ने गिफ्ट में यह चादर दी थी। इस चादर के साथ कई यादें जुड़ी हुई हैं। उनका गला भर आया।ड्ढr ड्ढr गांधीगिरीड्ढr अध्यक्षजी पुरानी पार्टी के हैं। पद पर आए तो कई लोग नाराज थे। ये खुद भी कड़ी जुबान रखते हैं। जिस तिस से उलझ पड़ते थे। इधर तेवर में बदलाव आया है। किसी नए आदमी से मिलते ही मुस्कुराकर गुलाब का फूल पेश करते हैं। विरोधी इसमें भी खोट निकाल रहे हैं। खानदानी पार्टी में गांधीगिरी का क्या मतलब? क्या पता कोई आदमी आलाकमान तक चुगली कर दे। अध्यक्षजी इसके लिए भी तैयार हैं। आखिर गुलाब का फूल ही तो दे रहे हैं। यह तो चाचा नेहरू का प्रिय है। चुगली करगा तो कह देंगे कि हम तो खानदान के महापुरुष के मुताबिक काम कर रहे हैं।

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  • Web Title: राजदरबार