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हड़ताल कामगारों की दशा दिशा तय करगी : बाबूलाल

द झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन के अध्यक्ष एवं पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने कहा कि 1से 21 की हड़ताल कामगारों की दशा एवं दिशा तय करेगी। कोयला क्षेत्र से बाहर समझौता होना ही शक पैदा करता है। लाखों खर्च कर बैठक होने पर भी न्यूनतम वेतन तय नहीं हो पाया है। संशय की स्थिति बनी हुई है। यह समझौते की विफलता है। इसके लिए प्रबंधन और यूनियन दोनों जिम्मेवार हैं। कामगारों का आक्रोशित होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन आतंक पैदा कर रहा है। गैरकानूनी रूप से कह रहा है कि आठ दिन का वेतन कटेगा। आतंक पैदा न कर उनकी भावनाओं के अनुरूप समझौता कर लेना चाहिए। आतंक पैदा कर शांतिपूर्ण आंदोलन के साथ छेड़छाड़ किया जाता है, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।ड्ढr जनवरी में समझौते का प्रयासड्ढr रांची। राष्ट्रीय कोयला मजदूर यूनियन के महामंत्री राजेश कुमार सिंह ने कहा कि पांचों यूनियनें जनवरी में ही वेतन समझौता फाइनल करना चाहती हैं। फरवरी में चुनाव की घोषणा हो जाने की संभावना है। ऐसा होने पर आचार संहित लागू हो जायेगा। फिर यह एक साल तक टल सकता है। पहले ही 27 माह की देरी हो चुकी है। कई लोग इसे चुनावी मुद्दा बनाने के लिए पूर्व में समझौता नहीं चाहते हैं। वही हड़ताल का नारा देकर कामगारों को गुमराह कर रहे हैं। ऐसे में कामगारों को ही तय करना है कि वह हड़ताल चाहते हैं या अच्छा वेतन समझौता।ड्ढr बढ़ रही है वेतन की खाईड्ढr रांची। राष्ट्रीय कोयला मजदूर कांग्रेस के अनुसार कामगार और अधिकारी के बीच वेतन की खाई बढ़ती जा रही है। अपर महामंत्री केएन सिंह ने कहा कि दूसर समझौते के वक्त टीएंडएस ग्रेड ए का बेसिक पे 722 रुपये था। वहीं इ-1 का बेसिक 750 एवं इ-2 का 800 रुपये था। यानी उनके बेसिक में क्रमश: 3.87 और 10.8 प्रतिशत का अंतर था। राव कमेटी की अनुशंसा के अनुसार ग्रेड ए से इ-1 के बेसिक में करीब 60.13 एवं इ-2 से 100.16 प्रतिशत ज्यादा है। पांच साल के समझौते में यह अधिकतम 20 से 30 प्रतिशत तक होना चाहिए।ड्ढr हड़ताल पर नहीं जाने की अपीलड्ढr रांची। सीसीएल प्रबंधन ने कामगारों से हड़ताल पर नहीं जाने की अपील की है। उसने कहा कि हड़ताल कंपनी के भविष्य को संकटग्रस्त करने वाली कार्रवाई होगी। इससे देश की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, कंपनी को भी क्षति होगी। नोटिस की मांग पर यूनियन एवं प्रबंधन के बीच जेबीसीसीआइ में समझौता या सहमति बन चुकी है।

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