अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

रब ने उड़ा दी यूपीए-निर्दलीय की नींद

अटकल-कयास के बीच जसे ही राज्यपाल सैयद सिब्ते राी ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की, यूपीए भारी बेचैनी में पड़ गया। यूपीए में लगी आग को बुझाने की कोशिशें भी तेज हुई है। शिबू का दूत बनकर दिल्ली में झामुमो सांसद हेमलाल मुमरू तथा सुमन महतो यूपीए नेताओं से पहल कर रहे हैं। जाहिर है जिद्द के साथ झामुमो मामले को पैचअप भी करने की फिराक में है। शिबू सोरन भी रविवार- सोमवार को दिल्ली जायेंगे। शिबू सीधे सोनिया गांधी और लालू प्रसाद से मिलना चाहते हैं। मुलाकात की पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है। लेकिन आखिरी फैसला सोनिया-लालू का ही होगा।ड्ढr यूपीए में लगी इस आग में एनडीए हाथ सेंक रहा है। राष्ट्रपति शासन के लिए एनडीए ने गवर्नर के बाद अब यूपीए नेतृत्व पर हल्ला बोल रखा है। विधायक अंदर से राष्ट्रपति शासन नहीं भी चाहते हों तो विरोध के स्वर तेज हैं। सत्ता संघर्ष की इस राजनीति के केंद्र में है लोकसभा चुनाव। कुछ यही कारण है कि यूपीए नेतृत्व झारखंड के मसले पर स्पष्ट फैसला लेने से हिचक रहा है। फिलहाल झामुमो की जिद्द मानने को कांग्रेस- राजद तैयार नहीं, पर इसके पत्ते तभी खुलेंगे, जब लालू प्रसाद जापान से लौटेंगे।ड्ढr शिबू पर प्रेशर बढ़ाने की कोशिश नाकामड्ढr प्रदेश में कांग्रेस- राजद की शिबू पर प्रेशर बढ़ाने की हर कोशिश नाकाम रही है। इस बार यूपीए के घटक दलों में मनमुटाव इतना बढ़ा है कि सरकार बन भी गयी, तो रिश्ते में खटास ही बढ़ेंगे। येन- केन- प्रकारेण बात बिगड़ी, तो गठबंधन टूटने की नौबत आ जायेगी। दरअसल झामुमो ने खुलकर कह दिया है कि बात बिगड़ी, तो अकेले चुनाव लड़ेंगे। इसे कांग्रेस नेतृत्व ने भी परख लिया है। प्रदेश में कांग्रेस- राजद के नेताओं और निर्दलीयों को झामुमो कोई तवज्जो नहीं दे रहा। बनते-बिगड़ते समीकरणों में इतना साफ है कि सरकार बनी, तो नेतृत्व झामुमो का ही होगा। वैसे झामुमो कब तक अपने फैसले पर अड़ेगा, यह देखना भी बाकी है। पिछली दफा शिबू ने कांग्रेस- राजद को एक झटके में झुका दिया था।ड्ढr चेहर उड़े हैं निर्दलीयों के रांची-दिल्ली एक किया पहली दफा निर्दलीयों का हर दांव उलटा पड़ता जा रहा है। राज्यपाल की सिफारिश के बाद निर्दलीयों के चेहर उड़ गये हैं। पहले तो निर्दलीयों ने एक- एक सीएम के लिए जुगाड़ लगायी, बात बनते नहीं देख सरकार बनाने में जुटे। चार दिन से दिल्ली में डेरा जमाये बंघु तिर्की शनिवार को रांची आये। वहीं मधु कोड़ा शिबू सोरन से मिले और तुरंत दिल्ली चले गये। भानूप्रताप शाही दिल्ली में ही जमे हैं। यूपीए सूत्रों के मुताबिक मधु कोड़ा, बंधु तिर्की और भानूप्रताप शाही, स्टीफन मरांडी के रुख से शिबू खासा नाराज हैं। लेकिन सरकार बनाने के लिए निर्दलीयों का समर्थन भी जरूरी है। सूत्रों की मानें, तो शिबू बंधु से फोन पर भी बात करने से परहेा करते हैं। इधर यूपीए नेतृत्व में भी स्पष्ट फैसला नहीं होने से निर्दलीयों की बेचैनी बढ़ी है। निर्दलीयों को यूपीए के आला नेता किसी प्रकार का तवज्जो भी नहीं दे रहे हैं।ड्ढr

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: रब ने उड़ा दी यूपीए-निर्दलीय की नींद