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पाक मीडिया : अमेरिकी चिंता से पाक परेशान

पाकिस्तान के बिगड़ते हालात को देखते हुए अमेरिका में पाकिस्तान के आणविक हथियारों के प्रति चिंता की प्रतिक्रिया तेज हो गई है। ओबामा सरकार जो 20 जनवरी को कार्यभार संभाल लेगी, इसके मुद्दे पर पहले से ही सतर्क हो गई है। अमेरिका को डर है कि अगर यह हथियार अलकायदा, तालिबान आतंकवादियों के हाथ लग गए तो वे अमेरिका को जबरदस्त नुकसान पहुंचाने के काबिल हो जाएंगे। अपनी आखिरी प्रेस कांफ्रेंस में एक प्रश्न के जवाब में राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा कि अमेरिका पर आतंकवादी हमला होने का खतरा बराबर बना हुआ है और हमें उस पर नजर बनाए रखनी चाहिए। जाहिर है इस खतर का अहसास आनेवाली अमेरिकी सरकार को भी है और इसी के चलते चुने हुए नए उपराष्ट्रपति जो बाइडन ने पाकिस्तान का दौरा किया और राष्ट्रपति जरदारी और प्रधानमंत्री गिलानी से बातचीत की। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ का 11 जनवरी का लेख जिनका अनुमान था ‘ओबामा का भयानक पाकिस्तानी सपना।’ इस लेख में डेलिड सानगर ने अमेरिका का यह खतरा उाागर किया है, पाकिस्तान सरकार के पास इन हथियारों के गलत हाथों में लगने के खिलाफ पूरा कंट्रोल नहीं। हालांकि पाकिस्तान बार-बार दोहरा रहा है कि हमारा इन हथियारों पर पूरा कंट्रोल है, पर अमेरिका को इन आश्वासनों पर भरोसा नहीं आ रहा। इस सिलसिले में पिछले साल राष्ट्रपति बुश से बातचीत में प्रधानमंत्री गिलानी ने बताया था कि उन्होंने एक बड़े मदरसे पर छापा मार कर कई आतंकवादियों को पकड़ लिया था, पर अमेरिकी इंटेलीजेंस के पास पाकिस्तानी फौा और आतंकवादियों की बातचीत के टेप रिकॉर्ड थे जिससे यह पता चला कि पाकिस्तानी फौा ने पहले से ही मदरसे पर छापा पड़ने की बात मदरसे वालों को बता दी थी। जंग ग्रुप के ‘दि न्यूज’, ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट में अमेरिका ने पाकिस्तान को अपने (पाकिस्तानी) आणविक हथियारों को सुरक्षित रखने के लिए पाकिस्तान की मदद की, लेकिन इन कदमों के बावजूद, पत्र कहता है, अमेरिका को भरोसा नहीं आ रहा। पत्र ने अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट द्वारा 1लोगों और तीन कंपनियों पर कार्रवाई की बात कही है जो पाकिस्तान के एटम बम के पितामह अब्दुल कादिर खान से जुड़े हुए थे। हालांकि प्रधानमंत्री गिलानी ने अब्दुल कादिर खान का अध्याय खत्म हुआ बताया और कहा कि पाकिस्तान एक जिम्मेदार आणविक देश है और किसी को इस पर शक नहीं होना चाहिए। पत्र ने आगे लिखा है कि यह भी अटकल लगाई जा रही है क्या मुंबई का हमला इसी कड़ी की ही चाल हो, ताकि भारत-पाकिस्तान लड़ाई शुरू हो जाए। पत्र फिर कहता है कि यह हो सकता है गलत हो लेकिन, जसा अमेरिका ने टेप रिकॉर्ड की गई बातचीत से यह तो शक पैदा होता है कि पाकिस्तान की इंटेलीजेंस आतंकवादियों से मिली हुई है। इन हालात में, पत्र ने आगे कहा है कि पाकिस्तान के अंदर ओबामा सरकार मिल-बैठ कर गंदगी की सफाई कर। जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान अभी भी ताकतवर ओहदों के मालिक तालिबानी का साथ पाकिस्तान के हक में मानते हैं। यही बात हमार प्रधानमंत्री ने भी कह डाली और पाकिस्तान बजाय इसके कि उचित मान कर कार्रवाई कर, पर्दा डालने की हर कोशिश कर रहा है। अमेरिका को जो भी खतरा हो, भारत जो पहले से ही पाकिस्तानी आतंकवाद का शिकार है, सीधा नुकसान उठा रहा है। प्रधानमंत्री गिलानी का नेशनल असेम्बली में बयान कि भारत की तरफ से दिया हुआ डोिअर (ािसमें सभी सबूत शामिल किए हैं) केवल जानकारी है सबूत नहीं, सभी मीडिया ने प्रकाशित किया है। ‘डॉन’, ‘दि न्यूज’, ‘फ्रंटियर पोस्ट’ इत्यादि ने या तो कोई टिप्पणी नहीं की है या अपने प्रधानमंत्री की बात को सच मान लिया है। ऐसे हालात में भारत क्या कर। भारत के गृहमंत्री चिदंबरम का बयान कि भारत को पाकिस्तान से सार राजनयिक, व्यापारिक, यातायात और आने-ााने पर रोक लगा देनी चाहिए, अगर पाकिस्तान 2611 के दोषियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं करता। ‘दि न्यूज’ ने कहा है कि भारत पाकिस्तान को दुनिया में अलग-थलग करने की नीति पर चल रहा है जो ठीक नहीं है। दोनों देशों में बातचीत वहीं की वहीं खड़ी हो गई है। अब दोनों देशों को दूसर मित्र देशों जसे चीन और ब्रिटेन की सहायता से आगे बढ़ना चाहिए। भारत को यह मान लेना चाहिए कि हो सकता है भारत के अंदर के आतंकवादी संगठन भी मुंबई हमले में शामिल हों। और इसी तरह पाकिस्तान को भी देखना चाहिए कि हमले के आतंकवादी पाकिस्तान से ही जुड़े हों। ‘दि नेशन’ ने इसे भारत की तरफ एक और धमकाने की बात कही है। पाकिस्तान सरकार ने मुंबई हमलों की जांच के लिए एक कमीशन कायम किया है, जिसके मुखिया होंगे फेडरल इनवेस्टीगेटिंग एजेंसी के अतिरिक्त डायरक्टर जनरल जावेद इकबाल और दो और सदस्य खालिद कुरैशी और लियाकत अली। यह कमीशन अगर जरूरत पड़ी तो भारत भी आ सकता है। यह समाचार सब मीडिया ने पहले पेज पर प्रकाशित किया है।

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