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लालच में निगम ने बेच डाली अरावली

मोटी कमाई करने की लालसा में सैकड़ों एकड़ जमीन बेचकर नगर निगम ने अरावली पर्वतमाला के सीने पर ‘लालच का हल’ चला दिया। राज्य सरकार ने भी निर्माण की अनुमति देकर अरावली को बिल्डरों के हवाले कर दिया। जो बड़ी दैत्याकार मशीनों से अरावली को छलनी कर रहे हैं। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को दी सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी की सिफारिशों ने साफ कर दिया कि इससे पहले की गई कमेटी की सिफारिशों को राज्य सरकार व स्थानीय निकाय ने अपने ढंग से परिभाषित करके अरावली में निर्माण की मंजूरी दी। नतीजतन नामीगिरामी बिल्डर्स ने वन आरक्षित क्षेत्र में धड़ल्ले से निर्माण जारी रखा। हरियाणा खनन विभाग के वित्तायुक्त एवं सचिव ने 15 अक्टूबर को 2008 को आदेश देकर अरावली में नींव खुदाई व निर्माण की अनुमति दी। इस बाबत 17 अक्टूबर 2008 को खनन अभियंता को पत्र भेजा गया। वित्तायुक्त एवं सचिव के आदेश की पालना करते हुए खनन अभियंता ने सहायक खनन इांीनियर एमपी शर्मा ने सराय ख्वाजा, रिवेन्यू स्टेट की ग्रीन फील्ड कालोनी, ओमेक्स, लेकवुड सिटी, सूराकुंड के साथ लगते क्षेत्र में नींव खोदने की अनुमति दे दी। खुदाई में निकलने वाले पत्थर पर 36 रुपये टन के हिसाब से रायल्टी लगा दी जोकि सरकारी खजाने में जमा हो रही है। वितायुक्त एवं सचिव ने भेजे पत्र में 27 जून 2008 को सुपीम कोर्ट से की गई सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी की सिफारिश का जिक्र किया। जिसमें हरियाणा शहरी एंड कंट्री प्लानिंग से नक्शा पास करवा चुके लोगों के प्रोजेक्ट को पूरा करने की अनुमति की बात कही। वितायुक्त के पत्र के बाद फरीदाबाद में नामीगिरामी बिल्डर्स ने बेसमेंट की खुदाई शुरू कर दी।

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