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बीपीएल सूची सुधार अभियान ठप

राज्यकर्मियों की हड़ताल ने बीपीएल सूची में सुधार के अभियान को ठप कर दिया है। मियाद खत्म होने के चार महीने बाद गत वर्ष दिसम्बर में शिकायतों के निपटार की प्रक्रिया अभी गति पकड़ ही रही थी कि हड़ताल ने आवेदनों को एकबार फिर अलमारी में बन्द करा दिया। बीपीएल सूची से गरीब को बाहर रखे जाने अथवा अमीर को इसमें शामिल करने जैसी पच्चीस लाख से अधिक शिकायतें सरकार को प्राप्त हुई थी। कर्मचारी सात जनवरी से हड़ताल पर हैं। उसके पहले तक लगभग एक लाख शिकायतों पर ही कार्रवाई हो सकी है।ड्ढr ड्ढr गौरतलब है कि नयी बीपीएल सूची में 15 लाख से अधिक नये परिवार जुड़े जबकि नौ लाख से अधिक परिवारों का नाम इससे बाहर हो गया। इस मुद्दे पर लगातार राजनैतिक आरोप-प्रत्यारोप के दौर चल रहे हैं और पूर राज्य में बवाल मचा है। जिनका नाम सूची से बाहर हो गया है, उनमें भारी आक्रोश है। नाराज लोग राशन और किरासन वितरण में बाधा डाल रहे हैं। इससे विधि-व्यवस्था की समस्या हो रही है।ड्ढr ड्ढr यह मामला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास पहुंचा तो सरकार ने सभी डीएम को शिकायतों पर कार्रवाई के लिए व्यक्ितगत रूप से जिम्मेदार बना दिया। तब जाकर कार्रवाई शुरू हुई। अन्यथा शिकायतों के निपटार की मियाद तो अगस्त में खत्म होने के बाद भी एसडीओ को इस तरफ झांकने की फुर्सत नहीं मिली थी। इस बाबत ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव अनूप मुखर्जी कहते हैं कि आवेदनों को तेजी से निबटाया जा रहा था लेकिन हड़ताल ने बाधा खड़ी कर दी है। इसका रास्ता निकाला जा रहा है। जिलों से लंबित शिकायतों की अद्यतन रिपोर्ट मांगी गयी है।

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