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इस साल आएंगी नौ करोड़ नई नौकरियां

आर्थिक मंदी में ‘इण्डिया शाइनिंग’ के नारे की चमक फीकी भले ही पड़ गई हो पर जल्दी ही नौकरी की किल्लत दूर होगी और यह नारा फिर उभरगा। एचआर विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिमी देशों की तुलना में भारतीय उद्योग मंदी के गुबार से जल्दी निकल आएँगे। देश में कुछ क्षेत्र नौकरियों के दरवाजे खोलेंगे..इक्का-दुक्का के लिए नहीं, बल्कि साढ़े आठ से नौ करोड़ लोगों के लिए। हालाँकि, नौकरियों का यह भंडार हर प्रांत और उद्योग के लिए नहीं होगा। जो क्षेत्र नौकरियों का भंडार खोलने वाले हैं उनमें आईटी, आउटसोर्सिग और रीटेल व्यवसाय जसे प्रतिष्ठित क्षेत्र हैं।ड्ढr ड्ढr दिग्गज कंपनियों, बोस्टन कन्सल्टिंग ग्रुप, मैनपॉवर, टीएनएस और गलप इंटरनेशनल ने इस बार में अलग-अलग सव्रे कराए थे। सव्रे के मुताबिक 200ी पहली तिमाही से ही कई क्षेत्रों में नई नौकरियाँ सामने आनी चाहिए। मैनपॉवर इंडिया के निदेशक चेरियन कुरुविला के मुताबिक इसकी वजह है- ‘जीडीपी का सात प्रतिशत के आस-पास रहना। मंदी में भी जीडीपी की मजबूती से भारतीय अर्थव्यवस्था में भरोसा बढ़ा है।’ भारत के सर्विस सेक्टर पर बोस्टन कन्सल्टिंग ग्रुप ने हाल ही में सव्रे किया था। इसके मुताबिक भारत में करीब 15 करोड़ लोग नौकरीपेशा हैं। कंपनी के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था भविष्य में नौकरी पेशा लोगों पर निर्भर करगी। लिहाजा आने वाले पाँच साल में नौकरियाँ बढ़नी ही बढ़नी हैं।ड्ढr ड्ढr बिजनेस एनालिसिस फर्म, टीएनएस और गैलप इंटरनेशनल ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सव्रे किया। पता चला कि 62 प्रतिशत भारतीयों को भरोसा है कि 200में उनकी नौकरी पर कोई संकट नहीं है।ं

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