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सत्यम वचन

उस रोज पटना वाले सूरज पांडे मिल गए। शीतलहरी में चापाकल पर नहा रहे थे। मैंन कहा-‘आप तो सुबह घाट से स्नान करके लौटे हैं। घंटा भर भी नहीं बीता होगा। इधर हैंडपंप के पानी से दोबारा नहा रहे हैं!’ सूरज पांडे कुड़कुड़ाते हुए बोले-‘जे गंगा में नहा लेता है, ओके कूआं के पानी से नहान की मनाही है का!’ मैंन कहा-‘नहीं, बात ये है कि आप ठहरे कंकड़ी-स्नान वाले। आज डबल बाथ ले रहे हैं। कोई बात तो होगी!’ सूरज पांडे ने पूछा-‘ई कंकरी-स्नान का है?’ मैंन कहा-‘जल से भरी हुई बाल्टी में अगर नहाने वाला एक कंकड़ दूर से फेंके, तो जो छींटे उसके पर पड़ जाएं, उसे कंकड़ी-स्नान कहते हैं।’ वे हंसने लग गए-‘हम तो चिरैया-स्नान वाले न हैं। पानी टच मारके उड़ लेते हैं। पर थोरा टेंसन में हैं। उ का है कि कपारे पर हीट चढ़ गया है। नहा के कूल हो रहे हैं!’ मैंने पूछा-‘कैसी टेंशन?’ सूरज पांडे मुंह का साबुन पोंछते हुए बोले-‘लोहरी-खिचरी सब हो गया। सूजरे भगवान दक्िखनायन से उत्तरायन हो गया। हम गंगा जी में जा के उबकी-डुबकी भी मारे। तब्बा काम नहीं सेरा रहा है। अपनी मार्केट का सटरवे गिरा पड़ा है। वही से तरनाए हुए हैं।’ मैंन कहा-‘ऐसा भी क्या?’ सूरज पांडे पंप पर से अंगौछा उठाते हुए बोले-‘आप तो ऐसे बूझ रहे हैं, जसे सीधा साइबेरिये से चले आ रहे हैं। आप को मालूम नहीं है कि हम आजकल अनएंप्लायड चल रहे हैं। प्लेसमेंटे नहीं है। अपनी रंगबाजी से एक जॉब भी लगा था। ओ भी चला गया। क्वालिफाइंग टेस्टवे में हम शिबू सोरेन हो गए। तब्बे से सर्विस खोज रहे हैं। आडवानी जी के जैसा कब तक इन वेटिंग रहेंगे जी? जहां जाओ, वहीं चार केंडीडेट लाइन तोर के आगे आ जाता हैं। कभी शेखावत जी का जइसा। कबहीं मोदी का मानिंद।’ मैंने कहा-‘भोले नाथ। आजकल नौकरी ऐसे ही नहीं मिलती। अब तो इद्दी-पिद्दी सोर्स-सिफारिशें भी नहीं चलती। उनके लिए भी मित्तल-अंबानी टाइप पौव्वा चाहिए। जिस भिखारी के कटोरे में पहले से ही नोट न पड़े हों, उसकी बोहनी तक नहीं हो पाती।’ सूरज पांडे ताव खा गए। बाल्टी का बचा हुआ पानी नीचे जमीन पर उंडेल दिया। पांव पटकते हुए बोले-‘ राजू, मैं भी जान गया हूं। आजकल काम दो ही तरीकों से होता है। या तो नोट से या चोट से। कहे भी हैं: आदमी में काम करवान का बूता चाहिए।ड्ढr हो न चांदी का तो फिर चमड़े का जूता चाहिए। मैंन कहा-‘हंडरेड परसेंट सत्यम वचन।’ सूरज पांडे अनसुना करते हुए खाली बाल्टी समेत मंदी की चाल से अपने घर की तरफ बढ़ गए।

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  • Web Title: सत्यम वचन