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क्रोन्ये ने मेरी सबसे अधिक परीक्षा ली: तेंदुलकर

क्रोन्ये ने मेरी सबसे अधिक परीक्षा ली: तेंदुलकर

मास्टर सचिन तेंदुलकर ने भले ही दुनिया के दिग्गज स्पिनरों की नाक में दम किया हो लेकिन दक्षिण अफ्रीका के दिवंगत कप्तान हैंसी क्रोन्ये की गेंदों ने उन्हें काफी परेशान किया।

मैच फिक्सिंग के आरोपों में प्रतिबंध लगने के बाद क्रोन्ये की एक विमान हादसे में मौत हो गई थी। तेंदुलकर को उनका सामना करने में सबसे अधिक परेशान हुई लेकिन इसका गेंदबाजी तकनीक से कोई लेना देना नहीं है। तेंदुलकर ने द गार्डियन से कहा कि ईमानदारी से कहूं तो मैं हैंसी की गेंद पर किसी भी गेंदबाज से अधिक बार आउट हुआ। जब हम दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेलते थे तो वह हमेशा मुझे एलन डोनाल्ड या शान पोलाक से अधिक आउट करता था। ऐसा नहीं था कि मैं उसकी गेंदबाजी समझ नहीं पाता था, दरअसल में गेंद हमेशा सीधे क्षेत्ररक्षक के पास चली जाती थी।

मध्यक्रम के बल्लेबाज क्रोन्ये ने अपनी मध्यम गति की गेंदों से 68 टेस्ट में 43 जबकि 188 एकदिवसीय मैचों में 114 विकेट चटकाए। वर्ष 2000 में सामने आए मैच फिक्सिंग स्कैंडल में वह मुख्य आरोपी थे। उनकी 2002 में विमान हादसे में मौत हो गई।
    
क्रोन्ये ने टेस्ट मैच में तेंदुलकर को पांच बार आउट किया जो महान स्पिनर मुथैया मुरलीधरन से दो जबकि आस्ट्रेलिया के दिग्गज तेज गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा और जेसन गिलेस्पी से एक कम है। इन तीनों ने हालांकि गेंदबाज के रूप में क्रोन्ये के मुकाबले कहीं अधिक बार तेंदुलकर का सामना किया।

क्रोन्ये का नाम हालांकि एकदिवसीय क्रिकेट में तेंदुलकर को सर्वाधिक बार आउट करने वाले गेंदबाजों की सूची में नहीं है। इस सूची में ब्रेट ली सबसे ऊपर हैं जिन्होंने भारत के इस बल्लेबाज को 10 बार आउट किया है। तेंदुलकर ने कहा कि क्रोन्ये का सामना करना हमेशा उनके लिए मुश्किल होता था।

उन्होंने कहा कि मैं डरबन में एक बार काफी अच्छा खेल रहा था और डोनाल्ड तथा पोलाक पर मैंने कुछ बड़े शाट खेले। इसके बाद हैंसी आया और मैंने उसकी पहली गेंद पर ही लेग स्लिप में कैच थमा दिया। मुझे कभी समझ नहीं आया कि उसका क्या करूं।

तेंदुलकर ने एक बार फिर मैक्ग्रा को सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाज बताया जिनका उन्होंने सामना किया है जबकि शेन वार्न पर दबदबा बनाने के बावजूद इस दिग्गज बल्लेबाज ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ स्पिनर बताया। उन्होंने कहा कि मैंने उसके (मैक्ग्रा) खिलाफ ठीक प्रदर्शन किया। लेकिन स्पिनरों में वार्न जब अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता है तो विशेष होता है।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को दो दशक से भी अधिक समय से हिस्सा इस 37 वर्षीय बल्लेबाज की तुलना कई बार सर डान ब्रैडमैन के साथ होती है और तेंदुलकर ने आस्ट्रेलिया के इस दिवंगत दिग्गज के साथ बिताये कुछ विशेष लम्हों को याद किया। उन्होंने कहा कि मैं उनके 90वें जन्मदिन पर उनसे मिलने गया। यह काफी विशेष था। हम औसत के बारे में बात कर रहे थे और मैंने कहा कि सर डान, अगर आप आज खेल रहे होते तो आपका औसत क्या होता और उन्होंने कहा संभवत: 70। मैंने पूछा, 70 क्यों, आपका असल औसत 99 क्यों नहीं, ब्रैडमैन ने कहा कि एक 90 बरस के व्यक्ति के लिए 70 का औसत भी बेकार नहीं है।

तेंदुलकर ने कहा कि यहीं मैं अपने बेटे से कहता हूं। आप चाहे 11 बरस के बच्चे हो या डान ब्रैडमैन, हमें कभी नहीं भूलना चाहिए कि यह सिर्फ एक खेल है जिसका हम सभी को लुत्फ उठाना है। तेंदुलकर ने कहा कि इस बरस टेस्ट क्रिकेट में 14000 रन पूरे करना उनके कैरियर का बड़ा लम्हा था लेकिन वह मैच पर व्यक्तिगत उपलब्धियों को कभी हावी नहीं होने देते।

इस दिग्गज बल्लेबाज ने कहा कि यह बड़ा लम्हा था लेकिन मैं मैच की स्थिति को लेकर पूरी तरह सतर्क था। तेंदुलकर जब बल्लेबाजी के लिए उतरे तब आस्ट्रेलिया के 478 रन के जवाब में भारत ने पहली पारी में 38 रन पर दो विकेट गंवा दिए थे। उन्होंने कहा कि तभी बड़ी स्क्रीन पर आया कि मुझे 14000 रन पूरे करने के लिए आठ रन की जरूरत है। मेरे प्रत्येक रन का जश्न मनाया गया। लेकिन जब मुझे दो रन की जरूरत थी तो मैंने चौका जड़ा। मैं खुश था लेकिन फिर मैंने सोचा, ठीक हैं जब हम क्रिकेट पर ध्यान दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि हां, बेशक ब्रायन लारा को पीछे छोड़ना विशेष था लेकिन अब मैं उससे भी अधिक खुश हूं और उम्मीद करता हूं कि यह जारी रहेगा।

 

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