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'बांका संसदीय सीट पर हवा का रुख साफ है'

बिहार के बांका संसदीय क्षेत्र में हो रहे उपचुनाव को त्रिकोणीय बनाने की कोशिशें जरूर की जा रही हैं लेकिन हवा का रुख साफ इशारा कर रहा है कि यदि कोई भारी उलटफेर नहीं हुआ तो दिवंगत पूर्व सांसद दिग्विजय सिंह की पत्नी पुतुल सिंह की राह कठिन नहीं होगी।

इस सीट पर हो रहे उपचुनाव के तहत आगामी एक नवम्बर को मतदान होना है। इसके लिए प्रत्याशियों का प्रचार अभियान चरम पर है। परंतु मतदाताओं ने अपनी चुप्पी अभी तक तोड़ी नहीं है। बांका संसदीय क्षेत्र से कुल मिलाकर सात प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला तीन प्रत्याशियों के बीच ही माना जा रहा है।

बांका संसदीय क्षेत्र में करीब 2.25 लाख मतदाता हैं और इसमें अमरपुर, धोरैया, बांका, कटोरिया तथा बेलहर विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिनमें धोरैया और बेलहर सुरक्षित क्षेत्र हैं।

बांका से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जहां पुतुल सिंह चुनाव मैदान में हैं वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से पूर्व केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश नारायण यादव भाग्य आजमा रहे हैं। निर्दलीय उम्मीदवार पुतुल को जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का समर्थन प्राप्त है, वहीं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इंद्रराज सिंह को चुनाव मैदान में उतारकर इस लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ा है।

उपचुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में किस्मत आजमा रहीं पुतुल सिंह को मतदाताओं की सहानुभूति मिलना तय माना जा रहा है, वहीं राजद उम्मीदवार जय प्रकाश बांका के विकास और सामाजिक न्याय के नाम पर मतदाताओं को राजद की तरफ मोड़ने के प्रयास में लगे हैं।

ऐसे तो मतदाताताओं ने चुप्पी साध रखी है, लेकिन जितने मतदाता मुंह खोल रहे हैं, उनके अनुसार सहानुभूति भारी पड़ती दिखाई दे रही है। ऊपर से सत्ताधारी गठबंधन के विकास के दावे हवा का रुख उनकी ओर मोड़ रहे हैं। बांका के 65 वर्षीय रामप्रवेश सिंह का स्पष्ट कहते हैं कि दादा (दिग्विजय सिंह को इसी नाम से इस क्षेत्र के लोग पुकारते थे) ने इस क्षेत्र के लोगों के लिए क्या नहीं किया। उन्होंने कहा कि बांका में रेलगाड़ी लाने का बड़ा काम दादा की ही देन है।

राजनीतिक जानकार भी इस बात को मानते हैं कि दादा के किए गए कार्य का फल पुतुल सिंह को मिलना तय है। गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह बांका से तीन बार सांसद चुने गए।

पिछले लोकसभा चुनाव में जद (यू) ने दिवंगत सिंह को टिकट नहीं दिया था तो उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था और जीत भी हासिल की। उस चुनाव में भी उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी राजद के जयप्रकाश नारायण यादव को 27,000 से ज्यादा मतों से हराया था।

पुतुल सिंह का मामना है कि दिग्विजय द्वारा प्रारंभ किए गए कार्यों को वह पूरा करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि दिग्विजय ने अपने क्षेत्र के विकास के लिए जो कदम उठाए थे उसे वह रूकना नहीं देखना चाहती। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सभी दलों ने उन्हें अपने टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए आमंत्रित किया था परंतु ऐसा कर वह उनकी आत्मा को दुख देना नहीं चाहती थी। वह कहती हैं कि उन्होंने सभी दलों से चुनाव में समर्थन भी मांगा था।

गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह के असामयिक निधन के बाद बांका सीट खाली हो गई थी और इस वजह से यहां उपचुनाव हो रहा है। बहरहाल, स्थिति जो भी हो मतदाता अभी खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं लेकिन एक नवम्बर को मतदाता अपना फैसला सुना देंगे और उनके फैसले का पता 24 नवम्बर को ही चलेगा, जब मतों की गिनती की जाएगी।

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