DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

2.39 घंटे तक ऑटोमेटिक सिग्नल ठप, जहां-तहां रुकीं ट्रेनें

मेट्रो से दफ्तर का सफर करने वालों के लिए शुक्रवार ‘सफर’ का दिन रहा। अचानक ऑटोमेटिक सिग्नल प्रणाली ठप होने से ट्रेनें जहां-तहां ठप हो गईं। लगभग आधे घंटे बाद मैनुअल संचालन के जरिए मेट्रो को चलाया गया, लेकिन तब तक सारी ट्रेनें लेट हो चुकी थीं। 2.39 घंटे तक ऑटोमेटिक सिग्नल सिस्टम बंद रहने के दरम्यान मेट्रो मैनुअल प्रणाली के तहत दौड़ी नहीं, चली और वह भी महज 25 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से। मिनटों का सफर घंटों में तय करने के कारण दैनिक यात्राी परेशान हो उठे और खबर फैलने तक नोएडा के स्टेशनों पर यात्राियों की भारी भीड़ जमा हो गई।
सुबह 09 बजकर 09 मिनट पर मेट्रो को ऑटोमेटिक सिग्नल सिस्टम ठप होने से भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। डीएमआरसी के मुख्य प्रवक्ता ने स्वीकार किया कि 2.39 घंटे तक सिग्नल सिस्टम प्रभावित रहने के कारण नोएडा-द्वारका और आनंद विहार-द्वारका लाइन की ट्रेनें अटक गईं। डीएमआरसी ने तकनीकी कारणों के आधार पर मैनुअल संचालन के तहत 25 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से ट्रेनें चलाईं। जानकारी के अनुसार 9.35 तक लाइन पर ट्रेनें जहां-तहां अटकी थीं और जब संचालन शुरू हुआ तो कम स्पीड के कारण नोएडा से द्वारका का डेढ़ घंटे का सफर लोगोंे ने सवा दो घंटे में पूरा किया।
फंसे दैनिक यात्राियों अतुल, घनश्याम तिवारी, राजेश वर्मा, मंजूषा राही आदि ने बताया कि मेट्रो के फंसने की वजह से नोएडा के कई स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर प्रवेश को भी रोक दिया गया था। प्लेटफॉर्म पर पहुंच चुकी भीड़ देर से आ रही मेट्रो में सवार होने के लिए अफरातफरी में रही। लोगों को इंतजार करने की जगह किसी तरह ठूंस कर अपने गंतव्य तक पहुंचना जरूरी लग रहा था, जिसमें महिलाओं को विशेष रूप से परेशानी हुई और इससे बचाव के लिए डीएमआरसी की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं किए जाने का रोष भी था।

सिस्टम कैसे होता है फेल
सर्किट ड्रॉप होने पर मेट्रो नियंत्रण की प्रणाली ऑटोमेटिक ट्रेन सुपरविजन (एटीसी) फेल हो जाती है और सिग्नल भी लाल हो जाता है। इससे ट्रेन जहां की तहां रुक जाती है। एटीसी फेल होने पर ऑटोमेटिक प्रणाली रुकने के बाद दो ही उपाय बचते हैं। या तो एटीसी को ठीक किया जाए या फिर तब तक मैनुअल संचालन किया जाए। मैनुअल संचालन की स्थिति में ट्रेन धीमी चलाई जाती है और पूरी सिस्टम धीमा हो जाता है। फेरे घट जाते हैं और यात्राियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है भीड़ में।
समस्या का सफर
त्त् 29 अक्टूबर को ऑटोमेटिक सिग्नल ठप, 2.39 घंटे तक औपचारिक परेशानी
त्त् 10 सितंबर को बारिश के कारण मेट्रो परिचालन अस्तव्यस्त, लेट हुए लोग
त्त् 09 सितंबर को बारिश में सिग्नल ठप, एक मेट्रो रुकी, पीछे कई जहां-तहां फंसी
त्त् 04 जून को द्वारका से नोएडा के बीच तकनीकी खराबी से मेट्रो हुई लेट
त्त् 01 जून को कंप्यूटर प्रणाली से जहां-तहां फंसी मेट्रो, यात्राी घंटों परेशान
त्त् 29 अप्रैल को दिल्ली में बारिश के कारण 45 मिनट अटकी नोएडा मेट्रो
त्त् 11 जनवरी को सेक्टर 18 मेट्रो स्टेशन पर एंट्री-एक्ज़िट गेट हो गया ठप

एक नजर..
7 लाख पहुंच रही नोएडा मेट्रो के यात्राियों की संख्या
6 स्टेशन हैं मेट्रो के नोएडा शहर के अंदर
6 किलोमीटर चलती है नोएडा के अंदर मेट्रो

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:2.39 घंटे तक ऑटोमेटिक सिग्नल ठप, जहां-तहां रुकीं ट्रेनें