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स्कूली छात्रा के साथ बलात्कारी पंडित को सजा


मंदिर में पूजा करने गई स्कूली छात्र के साथ दुष्कर्म करने के दोषी पुजारी को अदालत ने सात साल कैद की सजा सुनाई है। रोहिणी स्थित एडिशन सेशन जज संजीव अग्रवाल की अदालत ने पुजारी प्रेम दास को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(बलात्कार) के तहत दोषी ठहराते हुए कहा कि ‘अभियुक्त ने धार्मिक विश्वास को चोट पहुंचाई है। मंदिर में पुजारी को अहम स्थान प्राप्त होता है। मगर मुजरिम ने सारी मर्यादाओं को ताक पर रखकर घिनौने कृत्य को अंजाम दिया है। ऐसा अपराधी कठोर सजा का ही हकदार है।’ इसके अलावा अदालत ने दुष्कर्मी पुजारी पर दो हजार रुपये का जुर्माना भी किया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार नरेला क्षेत्र में रहने वाली आठवीं कक्षा की छात्र मई 2004 को मंदिर में पूजा करने गई थी। तभी उसे प्यास लगी और वह पानी पीने मंदिर के एक कमरे में गई। जहां पुजारी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। पुजारी ने छात्र को इसके बारे में किसी से नहीं बताने को लेकर धमकी भी दी। इतना ही नहीं पुजारी लगातार 9 महीने तक पीड़िता से बलात्कार करता रहा। इस बीच लड़की ने अपने माता-पिता को आपबीती बताई। तब परिजनों ने इस बाबत प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
इस मामले में पीड़िता के बयान अहम रहे। अदालत ने माना कि पीड़िता ने मुजरिम की पहचान की। बेशक पीड़िता घटना के समय नाबालिग थी, लेकिन नासमझ नहीं थी। उसने घटना का सिलसिलेवार ब्यौरा पेश किया। जो कि पूरी तरह विश्वसनीय हैं। लिहाजा अदालत मुजरिम पुजारी को सात साल सश्रम कैद की सजा सुनाती है।

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