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आर्थिक संबंधों की नई इबारत

प्रधानमंत्री नाओटो कान और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी से संबंधित करार (सीईपीए) को अपनी रजामंदी दे दी है। इस समझौते के प्रभाव में आने के बाद इससे न सिर्फ जापानी निर्यात व भारत में उसके निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते भी एक नई ऊंचाई पर होंगे। एक अरब बीस करोड़ आबादी वाले भारत के पास एक विशाल बाजार है और उसका सकल घरेलू उत्पाद भी पिछले वर्ष 7.4 प्रतिशत की दर से आगे रहा। भारत में जापान दक्षिण कोरिया से पिछड़ता जा रहा था, क्योंकि दक्षिण कोरिया ने भारत के साथ पहले ही आर्थिक साझेदारी का करार कर रखा है। अब जापान-भारत के बीच हुए सेपा समझौते से जापानी कंपनियों को भी कोरियाई ठेकों को झटकने का अवसर मिलेगा।
द जापान टाइम्स

बर्बादी की सड़क न बने न्यू सुहुआ
आखिर सरकार ने पूर्वी छोर तक भव्य, किंतु खतरनाक पहाड़ों पर सड़क बिछाने की परियोजना को गति देने की अनुमति दे ही दी। हालांकि यह निर्णय कोई बड़ी कीमत चुकाए बिना नहीं आया है। पिछले सप्ताह ही सुआओ-हुआलीन (सुहुआ) राजमार्ग पर ‘मेगी’ तूफान के दौरान हुए भूस्खलन में लोग मारे गए थे और दो दर्जन से अधिक तो अब भी लापता हैं। यह मार्ग अक्सर होने वाले भूस्खलन के लिए कुख्यात रहा है और मेगी से पहले पिछले कुछ वर्षो में अनेक मोटर सवार यहां पर मारे गए हैं। वर्षो से यह मांग की जाती रही है कि सुआओ और हुआलीन को जोड़ने के लिए एक नया राष्ट्रीय राजमार्ग बनाया जाए, ताकि स्थानीय लोगों के साथ-साथ पूर्व की ओर जाने वाले पर्यटक सुरक्षित व त्वरित यात्रा कर सकें, लेकिन हर बार पर्यावरण और आर्थिक कारणों से अड़ंगा लग जाता था।             
द चाइना पोस्ट

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