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सीबीआई जांच 'ढुलमुल', तभी तो वही मंत्री बरकार है: कोर्ट

सीबीआई जांच 'ढुलमुल', तभी तो वही मंत्री बरकार है: कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की 'ढुलमुल' जांच के लिए सीबीआई की जोरदार खिंचाई करते हुए शुक्रवार को कहा कि यही कारण है कि वही मंत्री आज भी काम कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इस मामले में दूरसंचार मंत्री ए राजा की कथित भूमिका की जांच चल रही है।

न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति एके गांगुली की पीठ ने सीबीआई को लताड़ते हुए कहा आपने कुछ नहीं किया। मामला गंभीर है। वही मंत्री तो आज भी काम कर रहा है। क्या सरकारी कामकाज का यही तरीका है क्या आप सभी मामलों में ऐसा ही करते हैं। एक साल से ज्यादा वक्त हो चुका है।

इस मामले को अदालत के सामने लाने वाले गैर सरकारी संगठन के वकील ने सीबीआई की जांच में ढीलेपन का मामला उठाया। अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल (एएसजी) हरेन रावल ने जब सीबीआई के बचाव में कुछ बातें कहीं तो न्यायालय ने सीबीआई के बारे में यह टिप्पणियां कीं।

एएसजी ने कहा कि इस मामले के दस्तावेजों की संख्या, जटिलता और गहनता के मद्देनजर जांच पूरी करने के लिए और समय की जरूरत है। रावल ने कहा कि हमें जांच के सिलसिले में बड़ी संख्या में फोन काल की करनी पडती है।
  
उनके वक्तव्य को काटते हुए हुए पीठ ने कहा कि यह ढुलमुल रवैया है। आप पांव घसीट रहे हैं। रावल ने अपनी बात जारी रखते हुए हालांकि कहा कि मामले की जटिल प्रकृति की वजह से जांच में समय लगा है।

रावल ने कहा कि निरंतरता बनाए रखने के लिए जांच शुरू से की जा रही है और एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। इस पर पीठ ने कहा क्या इसमें दस साल और लगेंगे।

एएसजी ने जवाब दिया कि जांच छह माह में पूरी हो जाएगी। न्यायालय ने मामले की सुनवाई 15 नवंबर तक स्थगित कर दी क्योंकि सॉलिसीटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम बीमार होने की वजह से उपस्थित नहीं थे। पीठ ने कहा कि जब अगली सुनवाई के दौरान सुब्रमण्यम पेश होंगे तो वह व्यापक सुनवाई करेगी और कुछ सवालों के जवाब मांगेगी।

पिछली सुनवाई 21 अक्टूबर को हुई थी। कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन के कारण सरकार को 1.4 लाख करोड़ रूपये का नुकसान हुआ। 21 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान इस रिपोर्ट का मसौदा भी न्यायालय में पेश किया गया था।
  
गैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन ने कैग की दोनों रिपोर्ट पेश की जिनमें स्पेक्ट्रम आवंटन में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने दूरसंचार विभाग से कैग की रिपोर्ट पर जवाब देने के लिए कहा था जिसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और दूरसंचार मंत्री राजा द्वारा कथित तौर पर पक्षपात किए जाने का आरोप लगाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इस मसौदा रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए कहा जिसमें आरोप लगाया गया है कि दूरसंचार मंत्रालय ने विधि मंत्रालय और प्रधानमंत्री के परामर्श की अनदेखी की और मनमाने तरीके से अंतिम तारीख तय कर कम दरों पर कुछ ऐसी कंपनियों के पक्ष में लाइसेंस जारी किए जो इसके लिए अपात्र थीं।

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