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क्रिकेट लीग में भारतीयों के निवेश से खुश ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट

क्रिकेट लीग में भारतीयों के निवेश से खुश ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट प्रशासकों ने यहां आईपीएल की तर्ज पर बिग बैश लीग में भारतीय धनकुबेरों समेत निजी निवेशकों द्वारा भारी रकम लगाए जाने का स्वागत किया है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख का तो मानना है कि इस लीग का असर कैरी पैकर की विश्व सीरिज़ की तरह होगा।
    
क्रिकेट प्रशासक इस बात से खुश है कि निजी निवेशक अपनी टीमों पर भारी पैसा लगा रहे हैं। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया आईपीएल की तरह इस मौके को भुनाने की कवायद में भले ही जुट गया हो लेकिन काफी एहतियात भी बरत रहा है।

न्यू साउथवेल्स के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि निजी निवेशकों को स्वीकार करने के लिए सीए पर काफी दबाव है। उन्होंने कहा कि निजी निवेश के रास्ते चार साल पहले आईपीएल के जरिए खुल गए थे जिसने भारतीय क्रिकेट बोर्ड की झोली भर दी। दूसरे देशों ने अपने खिलाड़ियों को भेजकर इस कमाई में सहयोग किया।
    
उन्होंने डेली टेलिग्राफ से कहा कि भारत ने जहां चांदी कूटी, वहीं सीए को नुकसान हुआ। यहां सैलानियों की तादाद कम हुई। क्रिकेट को निवेश की जरूरत है ताकि युवाओं और महिलाओं को भी खेल के प्रति आकर्षित किया जा सके।
     
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के बोर्ड के सदस्य तय करेंगे कि भारतीयों समेत विदेशी निवेशकों से निजी इक्विटी स्वीकार करनी है या नहीं। क्वींसलैंड के मुख्य कार्यकारी ग्राहम डिक्सन ने कहा कि इस मामले में सीए को स्पष्ट दिशानिर्देश देने होंगे। उन्होंने कहा कि हमें इस अवधारणा को स्वीकार करना होगा। निजी निवेश हो या नहीं, इस पर स्पष्ट राय होनी चाहिए।
   
मीडिया रपटों में कहा गया है कि ऑस्ट्रेलिया के दो सबसे दमदार क्रिकेट प्रांत न्यूसाउथ वेल्स और विक्टोरिया के मालिकों में भारतीय होंगे क्योंकि उन्होंने आईपीएल की तरह आठ टीमों के टी20 टूर्नामेंट के लिए छह करोड़ डॉलर में अपने अंश भारतीय कंपनियों को बेच दिए हैं। यह टूर्नामेंट जनवरी 2012 से शुरू होगा।
    
डेली टेलिग्राफ ने कहा कि ब्रिसबेन में बसे अडानी समूह ने बीबीएल के लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम में हिस्सेदारी खरीदने की इच्छा जताई है। यह समूह आईपीएल में टीम नहीं खरीद सका था। दस अरब डॉलर की संपदा के मालिक भारत के दसवें सबसे अमीर व्यक्ति गौतम अडानी क्वींसलैंड में कोयले की खाने और ब्रिसबेन में पोर्ट खरीदने की भी सोच रहे हैं।
     
भारतीय मूल के एक ऑस्ट्रेलियाई व्यवसायी के हवाले से कहा गया कि इन टीमों की मांग 50 लाख से तीन करोड़ डॉलर के बीच है जो इन धनकुबरों के लिए कुछ भी नहीं है। अखबार ने कहा कि न्यू साउथवेल्स क्रिकेट ने एक अलग व्यावसायिक ईकाई ब्लूज इनकॉरपोरेशन बनाई है जो राज्य की टी20 फ्रेंचाइज़ी का संचालन करेगी। भारतीय निवेशकों ने कंपनी के 49 प्रतिशत अंश मांगे हैं।

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