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बिहार चुनाव में मतदाता ले रहे हैं दिलचस्पी

बिहार चुनाव में मतदाता ले रहे हैं दिलचस्पी

चुनाव को लोकतंत्र का उत्सव कहा जाता है। इस जनतंत्र में 'जन' की भागीदारी अहम होती है। इस बार के विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत को देख चुनाव आयोग भी उत्साहित दिख रहा है। बीते चुनावों में मतदान के प्रतिशत में कमी को देखते हुए चुनाव आयोग ने लोगों को मतदान के लिए प्रोत्साहित करने के लिए बड़े दिग्गजों का सहारा लिया था।

राज्य में छह चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले तीन चरण के दौरान हुए मतदान में प्रत्येक चरण में 50 प्रतिशत से ज्यादा मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जबकि नवम्बर 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में 45. 9 प्रतिशत मतदाताओं ने ही मताधिकार का प्रयोग किया था।

प्रथम चरण के चुनाव में 47 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान हुआ। इस चरण में 1,07,00,797 मतदाताओं में से 54. 31 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। कटिहार जिले में सबसे ज्यादा 57. 5 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले जबकि किशनगंज में 57 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

इसी तरह दूसरे चरण में 45 विधानसभा क्षेत्रों के मतदान के दौरान 98,44,981 मतदाताओं में से 52. 55 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मुजफ्फरपुर में 53. 35 प्रतिशत मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया जबकि समस्तीपुर में 54. 3 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट दिए।

तीसरे चरण के चुनाव में 48 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव हुए। इस चुनाव में 1,03,76,022 मतदाताओं में से 53. 65 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इनमें से पश्चिम चम्पारण में 58 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मतों का प्रयोग किया।

आंकड़ों पर गौर करें तो तीसरे चरण में छह जिलों पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण, सारण, गोपालगंज, सीवान तथा वैशाली में मतदान हुआ उन क्षेत्रों में पिछले विधानसभा चुनाव में 47. 36 प्रतिशत मतदान हुआ था जबकि वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में इन क्षेत्रों में 43. 74 फीसदी मतदाताओं ने ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।

इधर, अन्य विधानसभा चुनावों में मतदान प्रतिशत को देखा जाए तो वर्तमान विधानसभा चुनाव की स्थिति संतोषजनक है। फरवरी 2005 के विधानसभा चुनाव में 46. 6 प्रतिशत मतदाताओं ने ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया था जबकि वर्ष 2000 में हुए चुनाव में यह आंकड़ा 62 प्रतिशत से ज्यादा था।

गौरतलब है कि वर्ष 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (इवीएम) का प्रयोग किया गया था।

उल्लेखनीय है कि बिहार में नक्सलियों द्वारा पिछले चार बार से चुनावों के बहिष्कार की धमकी मतदाताओं को दी जाती रही है। चुनाव के बाद मत देने वाले मतदाताओं को भी समय-समय पर नक्सलियों का कोपभाजन भी बनना पड़ा है।

इधर, राजनीतिक विश्लेषक भी इस चुनाव में मतदान के प्रतिशत की वृद्घि को लांकतंत्र के लिए शुभ संकेत मान रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक गंगा प्रसाद का मानना है कि बिहार में यह चुनाव कई मामलों में अलग है। पहली बात तो यह है कि यह चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ा जा रहा है। यही कारण है कि मतदाता अपने विकास को लेकर सजग नजर आ रहे हैं और मत कर रहे हैं।

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  • Web Title:बिहार चुनाव में मतदाता ले रहे हैं खूब दिलचस्पी