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दो टूक (29 अक्टूबर, 2010)

दिल्ली विस्फोट के पांच साल पूरे हो रहे हैं। कई परिवारों को उजाड़ देनेवाली उस घटना के जख्म एक बार फिर हरे हो गए। पीड़ित परिवारों की उम्मीदों में खुली आंखें हृदयविदारक है।

इस मौके पर हमें यह सीख भी लेनी चाहिए कि हम सुरक्षा के लिए हमें भी सतर्क होना चाहिए। अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को समझकर ही हम ऐसी घटनाओं के होने की आशंका को कम कर सकते हैं।

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  • Web Title:दो टूक (29 अक्टूबर, 2010)