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साइबर डायरीः साइबर खतरों के तीन नए क्षेत्र

वर्ष 2011 में तीन नए और खास साइबर खतरों के प्रति एक नई शोध रिपोर्ट में चेताया गया है। जॉजिर्या टेक्नीकल इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी सेंटर की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक यह खतरा डेस्कटॉप से कहीं ज्यादा मोबाइल उपकरणों जैसे लैपटॉप, नेटबुक और मोबाइल पर होगा।

इंटरनेट के बढ़ते प्रचलन और नेटवर्क उपकरणों की वजह से साइबर अपराधियों के लिए जानकारियां चुरा लेना पहले की अपेक्षा आसान हो गया है और इससे कई संस्थानों के ऊपर साइबर खतरा गहरा रहा है। इस रिपोर्ट में उन तीन नए क्षेत्रों का ब्योरा भी दिया गया है जिन पर साइबर खतरों का सबसे ज्यादा दबाव है।

नेटवर्क सिस्टम पर खतरा : जिस तरह से दुनिया तेजी से एक बड़े नेटवर्क में बदल रही है, वैसे वैसे साइबर अपराधों का खतरा भी बढ़ रहा है। शोध संस्थान आपस में जुड़ रहे हैं, स्कूल और कॉलेज आपस मे जुड़ रहे हैं और व्यापारिक प्रतिष्ठान भी। इससे यहाँ अवांछित और अनाधिकृत घुसपैठ का खतरा बढ़ना स्वाभाविक है। जीटीआईएसएस की रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य संस्थानों और अस्पतालों पर साइबर हमले होने की सम्भावना काफी प्रबल है।

बोटनेट का हमला : बोटनेट हमले के तहत किसी मालवेयर को सुनियोजित तरीके से किसी बड़े नेटवर्क पर प्रेषित कर पूरे सिस्टम को प्रभावित कर दिया जाता है। जीटीआईएसएस की रिपोर्ट के अनुसार 2011 में इस तरह के हमले पहले से अधिक संख्या में होंगे। साइबर अपराधी अब काफी उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल कर हानिकारक सॉफ्टवेयर फैलाने में जुटे हैं। इनसे सभी को सावधान हो जाना चाहिए।

मोबाइल उपकरणों पर खतरा : आज मोबाइल फोन पर इंटरनेट एक्सेस आम बात है और लोग लाखों की संख्या में एप्लिकेशनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें भी मुफ्त के चक्कर में कई मुफ्त अवांछित एप्लिकेशन्स डाउनलोड के लिए उपलब्ध कराई जाती हैं, परंतु इनमें से कई बेहद असुरक्षित भी हैं। हर प्रयोक्ता को चाहिए कि वह किसी भी एप्लिकेशन को पर्याप्त सुरक्षा जांच किए बगैर उन्हें अपने मोबाइल में इंस्टॉल न करे।

सावधानी न बरतने पर साइबर अपराधियों के लिए मोबाइल उपकरण तक पहुंच बनाना आसान हो जाता है और इससे निजी और गोपनीय जानकारियों तक उनकी पहुंच बन जाती है। जीटीआईएसएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि साइबर अपराध से निपटने के लिए अब परम्परागत तरीको को छोड़ नए तरीकों को आक्रामक ढंग से लागू करना होगा, वरना इसके घातक परिणाम सामने आएंगे।

इसे देखते हुए ही रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) अपने संवेदनशील आंकड़ों को साइबर हमलों से बचाने के लिए एक अत्याधुनिक संचालन प्रणाली विकसित कर रहा है। डीआरडीओ के महानिदेशक वी. क़े. सारस्वत के मुताबिक सितंबर में शुरू की गई स्वदेशी कंप्यूटिंग परियोजना को लागू करने के लिए एक खास खाका तैयार किया जा रहा है।

बेंगलुरु और दिल्ली में लागू होने वाली यह संचालन प्रणाली दुनिया भर में इस्तेमाल की जाने वाली प्रणालियों के जैसी ही है। सारस्वत ने कहा कि भले ही यह विंडो सॉफ्टवेयर सहित एक रियल टाइम प्रणाली होगी, लेकिन इस पर सोर्स कोड और आर्किटेर का आधिपत्य होगा, जो कि बाहरी तत्वों से हमारी सुरक्षा प्रणाली की हिफाजत करेगा। नई संचालन प्रणाली, इंटरनेट से होने वाले साइबर हमलों के प्रति ज्यादा कारगर ढंग से काम करेगी।

याहू भी ढला नए रंग में जीमेल और हॉटमेल के बढते प्रभाव की वजह से याहू मेल को भी अपना आवरण बदलने और नई सुविधाएं प्रदान करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। करीब पांच साल के बाद याहू ने अपने लोकप्रिय मेल सिस्टम में बदलाव किए हैं और कुछ नई सुविधाएं जोड़ी हैं। याहू मेल के प्रयोक्ता अब वहीं से फेसबुक और ट्विटर पर स्टेटस अपडेट कर सकते हैं। यही नहीं, अब याहू मेल से ही फ्लिकर और पिकासा की तस्वीरें देखना और यूटय़ूब वीडियो का आनंद लेना सम्भव कर दिया गया है।

नई सुविधाओं के बारे में याहू मेल के वरिष्ठ उत्पाद मैनेजर डेव मैक्डोवल का कहना है कि - लोग याहू मेल पर प्रति माह 300 बिलियन मिनट गुजारते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि लोगों को उनके समय का सही उपयोग करने दिया जाए। पहले लोग सोशल नेटवर्किग साइटों का इतना उपयोग नहीं करते थे, परंतु आज जमाना बदल गया है और समय के साथ चलने की समझदारी आखिर याहू को भी दिखानी पड़ी है।

यही नहीं, याहू ने अपनी स्पैम फिल्टरिंग को भी सुधारा है और अब मेल सर्च करना भी आसान बनाया है। उसका नया सर्च टूल ईमेलों का वर्गीकरण अधिक बेहतर तरीके से करता है। जीमेल के बढ़ते प्रभाव का याहू मेल की लोकप्रियता पर असर पड़ते देख यह कवायद की गई है।

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