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सरकारी डॉक्टरों ने नहीं किया काम, मरीज परेशान

लखनऊ में परिवार कल्याण विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक की हत्या किए जाने के विरोध में कानपुर के सरकारी अस्पतालों के करीब 200 डॉक्टरों ने अपने कार्यों का बहिष्कार किया जिससे मरीजों को खासी परेशानी हुई।

शहर के जिला अस्पताल उर्सला, केपीएम अस्पताल, डफरिन महिला अस्पताल तथा ग्रामीण इलाकों में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (पीएचसी) में आज ओपीडी के ताले नहीं खुले और सभी सरकारी अस्पतालों में छुट्टी जैसा माहौल दिखा। अस्पतालों में डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार का सबसे ज्यादा खामियाजा दूर दराज से आये गरीब मरीजों को उठाना पड़ा जो मजबूरी में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम जाने पर मजबूर हुये।

गौरतलब है कि कल लखनऊ में परिवार कल्याण विभाग के सीएमओ डां विनोद आर्या की सुबह घर के बाहर टहलते समय हत्या कर दी गयी थी। इस घटना के विरोध में सभी सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों ने आज कार्य बहिष्कार का ऐलान किया था।

शहर के मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ अशोक मिश्रा ने बताया कि प्रान्तीय चिकित्सा सेवा संघ (पीएमएस एसोसिएशन) के आह्वान पर आज शहर के सभी सरकारी डॉक्टर अपने कार्य का बहिष्कार कर रहे हैं। इस दौरान वह ओपीडी में कोई मरीज नहीं देखेंगे। लेकिन इस दौरान इमरजेंसी सेवाओं और पोस्टमार्टम का काम सरकारी डॉक्टर पहले की भांति करते रहेंगे।

कानपुर शहर में पीएमएस सेवा के करीब 200 डाँक्टर हैं इसलिये इनके कार्य बहिष्कार से सरकारी अस्पतालों में कामकाज बुरी तरह से प्रभावित हुआ। सीएमओ डॉ मिश्रा ने बताया कि आज शहर के उर्सला और केपीएम अस्पताल सहित किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर ओपीडी में मरीजों को नहीं देखा जा रहा है लेकिन अस्पतालों में पहले से भर्ती मरीजों का इलाज हो रहा है और इमरजेंसी में आने वाले मरीज भी देखे जा रहे हैं।

उर्सला अस्पताल के निदेशक डां डीपी मिश्रा ने बताया कि परिवार कल्याण विभाग के सीएमओ डां विनोद आर्या की हत्या से कानपुर के डॉक्टर बहुत दुखी हैं। डॉ आर्या लखनऊ जाने से पहले कानपुर में ही कार्यरत थे इसलिये यहां के डॉक्टरों का उनसे काफी लगाव था। इसी दुख के कारण आज पीएमएस सवंर्ग के सरकारी डॉक्टरों ने विरोध स्वरूप काम न करने का फैसला किया।

उन्होंने बताया कि आज उर्सला अस्पताल में एक शोक सभा में डॉ आर्या की मौत पर शोक व्यक्त किया गया और उन्हें श्रद्धांजलि दी गयी। उन्होंने कहा कि चिकित्सक आज अस्पताल आये जरूर लेकिन ओपीडी में नहीं गए। बहरहाल, उन्होंने अस्पताल में पहले से भर्ती मरीजों को देखा और उनका इलाज किया। जिन डॉक्टरों की ड्यूटी पोस्टमार्टम में लगी थी वह अपनी ड्यूटी पर गये। डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार सबसे ज्यादा असर उर्सला अस्पताल, केपीएम अस्पताल और डफरिन महिला अस्पताल में देखा गया जहां डॉक्टरों के ओपीडी में न बैठने की वजह से, दूर दराज से आये गरीब मरीज इधर- उधर भटकते देखे गये।

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