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बढ़ गयी राज्यपाल की भूमिका और दायित्व

राज्य में राष्ट्र्पति शासन लगते ही राज्यपाल की भूमिका और दायित्वों में विस्तार हो गया है। प्रेसिडेंट रूल में राज्य का शासन सीधे राजभवन के अधीन हो जाता है। सत्ता संचालन के लिए केंद्र सरकार राज्यपाल के सलाहकारों की नियुक्ित करगी। सामान्य संसदीय व्यवस्था में मंत्रियों का जो दायित्व होता है, राष्ट्रपति शासन में राज्यपाल के सलाहकार भी कमोबेश उसी भूमिका में होते हैं। सलाहकारों के बीच विभागों का बंटवारा होगा। इस शासन में सीएस का दायित्व और महत्व भी काफी बढ़ जाता है। प्रेसिडेंट रूल में नौकरशाही प्रभावी भूमिका में आ जाती है।ड्ढr संसद से पास होगा राज्य का बजटड्ढr राज्य में केंद्र का राष्ट्रपति शासन होने और विधानसभा निलंबित रहने के कारण अनुपूरक एवं मूल बजट संसद से पारित होगा। राज्य सरकार बजट प्रारूप बनाएगी । राज्यपाल का अनुमोदन मिलने के बाद बजट दस्तावेज केंद्र सरकार को भेजा जायेगा। संसद के दोनों सदनों की मंजूरी के बाद राज्य सरकार राशि खर्च कर सकेगी।ड्ढr बनेगा रूल्स ऑफ बिजनेसड्ढr सरकारी कामकाज के संचालन के लिए पहले से स्थापित कार्यपालिका नियमावली राष्ट्रपति शासन में निष्प्रभावी हो जाती है। राज्यपाल के सत्ता संभालते ही नयी व्यवस्था में सरकारी कामकाज के लिए रूल्स ऑफ बिजनेस बनेगा। इस पर राष्ट्रपति की मंजूरी ली जायेगी। रूल्स ऑफ बिजनेस के आधार पर ही फाइलों का निष्पादन होगा। इसमें कामकाज के अधिकार निर्धारित होते हैं।ड्ढr चलती रहेगी विधायक फंड की योजनाड्ढr विधानसभा निलंबित कर राष्ट्र्पति शासन लगाने के बाद क्षेत्रीय विकास के लिए विधायक फंड से चलनेवाली योजनाएं जारी रहेंगी।

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