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बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मर्यादा भूल रहे हैं नेता

बिहार में चुनाव हों और यहां के नेता आग न उगलें, ऐसा कम ही देखने को मिलता है। राज्य में जारी विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण में पहुंचे ही नेताओं ने राजनीतिक मर्यादाओं को ताक पर रखते हुए एक दूसरे के खिलाफ जहर उगलना आरंभ कर दिया है।

जैसे-जैसे यह चुनाव अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो रहा है और नेतागण अपनी मर्यादा भूल कर जहर उगलने लगे हैं।

इस चुनाव में इसकी शुरुआत जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव ने की। फतुहा में एक चुनावी सभा में उन्होंने कांग्रेस के परिवारवाद पर निशाना साधते-साधते कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को गंगा में फेंक देने की बात कह दी। इसके बाद तो नेताओं की जुबान फिसलती ही जा रही है।

मंगलवार को राज्य के मंत्री गिरिराज सिंह ने भी राहुल पर व्यक्तिगत टिप्पणी कर माहौल को और गरमा दिया। कांग्रेस ने तो निर्वाचन विभाग में जाकर इसकी शिकायत तक की है और इस मामले में दोनों नेताओं पर कार्रवाई की मांग की है।

इस बीच, ये मामले अभी ठंडा भी नहीं पड़े थे कि कल तक नेताओं को अपनी मर्यादा में रहने की सलाह देने वाले लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के अध्यक्ष रामविलास पासवान ने भी मर्यादा तोड़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी पर ही निशाना साधते हुए उन पर व्यक्तिगत टिप्पणी कर दी।

ऐसा नहीं है कि बिहार के लिए यह नई बात हो। पिछले लोकसभा चुनाव में भी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद ने राहुल की छाती पर रोलर चलवाने का बयान दिया था जबकि उनकी पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जद (यु) के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह पर एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए बेहद निजी टिप्पणी की थी। यह मामला तो अभी भी न्यायालय में लंबित है।

इस प्रकार की बयानबाजियों को राजनीतिक जानकार भी सही नहीं मानते। राजनीतिक विश्लेषक सुरेंद्र किशोर कहते हैं कि जब नेताओं के पास तकरे और किए गए कायरे के ब्योरे का अभाव हो जाता है, तो वे ऐसे कुतकरे पर उतर जाते हैं। वह स्पष्ट कहते हैं कि गांधी और नेहरू के समय ऐसी बयानबाजी क्यों नहीं होती थी? उन्होंने कहा कि ऐसे बयानबाजी से बिहार और देश की ही नहीं लोकतंत्र की छवि खराब हो रही है।

ऐसी ही बयानबाजियों से नेता लोकतंत्र पर उंगली उठाने का मौका दे देते हैं। वह कहते हैं कि इसे दूसरे शब्दों में जनतंत्र में गिरावट के रूप में भी देखा जा सकता है। आज नेताओं के पास चुनाव के समय कहने को कुछ नहीं रहता। इस कारण ऐसा हो रहा है। परंतु वह यह भी कहते हैं कि जिन नेताओं के पास लोगों को कहने के लिए है वे ऐसे बयानबाजी नहीं करते।

फिल्म अभिनेता और भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा भी कहते हैं कि ऐसे बयानों से नेताओं को बचना चाहिए। नेताओं को वाणी पर संयम और मर्यादा का ख्याल रखना चाहिए।

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