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समय से पहले और बाद में काम निपटाने वाले परेशान

कॉमनवेल्थ खेल भले ही खत्म हो गया, लेकिन खेलों के दौरान मैदान से बाहर हुआ ‘खेल’ अब भी जारी है। जिसे सही तरह से निपटाने के लिए नियुक्त किये गए अधिकारी रैफरी की भूमिका में हैं। जिनका फैसला इस खेल से जुड़े लोगों को विजयी और हारा हुआ घोषित करेगा। इसके लिए कैग, सीबीआई व सीवीसी का निर्णय पर दारोमदार है।
आलम यह है कि इन योजनाओं को कम समय में पूरा करने का दम भरने वाले अधिकारी भी अब जांच अधिकारियों को कनखी से झांक रहे हैं। विभिन्न जांच एजेंसियों की सक्रियता बढ़ने के बाद वे घबराहट में हैं।
जांच एजेंसियां इस बात पर फोकस कर रही हैं कि सभी निर्माण एजेंसियों ने काम जल्दी निपटाने में ऐसा क्या काम किया कि प्रोजेक्ट की कीमत इतनी अधिक कैसे बढ़ गई। जबकि इसमें सिर्फ अगर बढ़ाई जा सकती थी तो लेबरों की संख्या। बाकी सब कुछ तो पुराना ही था। थोड़ा बहुत सीमेंट और स्टील की दरों को बढ़ने के अतिरिक्त कोई कार्य नहीं हुआ।  
पहले स्टेडियम तैयार होते ही शाबाशी लेने की होड़ मच  रही थी। खेल विभाग से लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री तक अपने मातहतों की पीठ थपथपाने में पीछे नहीं थी कि काम को रिकार्ड समय में पूरा कर दिया। लेकिन अब इस संबंध में कोई बात करने के लिए तैयार नहीं।
जब जांच एजेंसियां उनके इसी काम को जल्दी खत्म करने का कारण पूछ रहे हैं तो उनके पास जवाब नहीं बन रहे हैं। उन्हें एक ही चिंता सता रही है कि कैसे खुद को पाक-साफ दिखाएं। कुछ लोगों को यह मलाल है कि तीन साल वाला काम डेढ़ साल में पूरा करने के बाद कैसे जवाब दें कि इस पर कैसे अधिक पैसा खर्च हुआ?
खेलगांव का निर्माण डीडीए ने कराया था। डीडीए की तरफ से खेलगांव में सुविधाएं और रिहायशी कालोनी को एम्मार-एमजीएफ कंपनी ने विकसित किया है। इसके अलावा यमुना स्पोर्ट्स कांपलेक्स और सीरीफोर्ट कांपलेक्स में स्टेडियमों का निर्माण बड़ी योजनाओं में शामिल है।
 इसी प्रकार केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग ने नेहरू स्टेडियम सहित दस बड़े स्टेडियम भारतीय खेल प्राधिकरण के लिए बनाए हैं। जबकि लोक निर्माण विभाग ने त्यागराज व छत्रसाल स्टेडियम एवं सड़क मार्ग की 23 बड़ी योजनाएं पूरी की है। इनमें से लगभग सभी योजनाएं समय में पूरी की गई है। कैग, सीबीआई, केन्द्रीय सतर्कता आयोग और अन्य एजेंसियों के सक्रिय होने के बाद अफसरों को अब यही डर सता रहा है कि जिन लोगों ने अत्याधिक दबाव या जल्दबाजी में काम किया, शिकंजे में फंस सकते हैं।

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