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देहात के दो दर्जन गांवों में मिलावट माफिया सक्रिय

त्योहारों पर पूरे एनसीआर में नकली दूध और मावा सप्लाई करने की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं। देहात के दो दजर्न से अधिक गांवों में इन दिनों रात-दिन एक करके एनसीआर से थोक में मिले ऑर्डर पूरे करने की कवायद जारी है। मिलावट माफियाओं ने एनसीआर में नकली दूध और मावा भेजना भी शुरू कर दिया है लेकिन पुलिस-प्रशासन ने अभी तक उनकी धरपकड़ शुरू नहीं की है।


हालांकि प्रशासन ने पूरे जिले में नकली दूध, मावा और उससे बनीं मिठाइयों को बिकने से पहले उन्हें जब्त करने के लिये चार टीमें बनाई हैं। फूड एंड ड्रग डिपार्टमेंट की कमान सिटी मजिस्ट्रेट उमेश मिश्र को सौंपी गई है। एक टीम लोनी, एक टीम सदर, एक टीम हापुड़ और एक टीम मोदी नगर में छापेमारी करेगी। सदर में दो एक स्थानों को छोड़कर टीमें कहीं भी सक्रिय दिखाई नहीं दे रहीं। प्रशासन का दावा है कि पकड़े जाने पर मिलावट माफियाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

इन गांवों में हो रहा है नकली कारोबार
कस्तला, ढबारसी, बङोड़ा कलां, बङोड़ा खुर्द, सिखेड़ा, सोलाना, नानपुर, जादौपुर, दहपा, कमालपुर, नाहल, देहरा, पिपलेड़ा, सिकरौड़ा, अतरौली, नया गांव, कुशलिया, अनवरपुर, कलछीना, नाहली, निडौरी आदि।

ऐसे बनता है नकली दूध
पहले चाहिये रिफाइंड ऑयल, सफेद खाने वाला चूना और ईजी सर्फ। मिलावट माफिया एक परात में गीला चूना बिछा लेते हैं। फिर एक लीटर प्योर दूध, दो ढक्कन ईजी सर्फ और एक लीटर रिफाइंड ऑयल मिक्स करके धार बनाकर परात में चूने में मिलाते हैं। फिर इसमें दस लीटर पानी मिलाते हैं तो कुल 12 लीटर नकली दूध बनकर तैयार हो जाता है। यह दूध बनाने के बाद बाजार में तीस रुपये किलो के भाव से बिक जाता है जबकि लागत केवल 14 से 15 रुपये ही आती है।

कैसे बनता है नकली मावा
तैयार दस लीटर नकली दूध में मिलावट माफिया बीस किलो सूखे दूध का पाउडर मिलाते हैं तो चिकनाई के लिए घटिया स्तर का घी मिलाया जाता है। फिर इसे कढ़ाई में आग पर पकाया जाता है। पकने के बाद 20 किलो मावा बनकर तैयार होता है। इसकी लागत केवल 70 रुपए आती है जबकि बाजार में यह 150 रुपए तक बिक जाता है।

कौन सी हो सकती हैं बीमारियां
स्वास्थ्य अधिकारी डी.के.सिन्हा ने बताया कि नकली दूध और मावे से बनी मिठाइयां खाने से हृदय, लीवर डेमेज, डायरिया, पेटदर्द, पीलिया, पाचन तंत्र कमजोर आदि रोग होने का खतरा रहता है।

प्रशासन के दावे
पुलिस और खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने जनवरी से सितम्बर तक कुल 232 नमूने लिये। इन्हें लखनऊ जांच के लिये भेजा। इनमें से 49 नमूने फेल पाये गये। एसीजेएम कोर्ट में 7-16 एक्ट के तहत इनपर मुकदमे कायम किये गये हैं। सिटी मजिस्ट्रेट उमेश मिश्र ने बताया कुल 32 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई हैं। अक्तूबर में अब तक 19 सैंपल लिये गये हैं। बुधवार को कविनगर बी.ब्लॉक से चार नमूने लिये गये।

कैसे करें नकली की पहचान
दूध लेकर हल्का सा पियें। कड़वा लगे तो दूध मिलावटी है। उबालकर देखें। दही जमायें तो सिंथेटिक दूध का दही नहीं जमेगा। मावा ज्यादा पीला है तो वह मिलावटी है। हथेली में रगड़ें। अगर चिकनाई न निकले तो यह मिलावटी है।

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