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जोश की जरूरत

वह अपनी टीम को समझा रहे थे। बता रहे थे कि कैसे हर काम में आत्मविश्वास चाहिए। कुल मिलाकर उनकी कोशिश यह थी कि उनकी टीम बेहतर काम करे। उसका असर भी उन्हें दिखने लगा था।

‘द हैप्पीनेस प्रोजेक्ट’ की लेखिका ग्रेचेन रूबिन का मानना है कि जिंदगी में कुछ नया करने के लिए आत्मविश्वास से भी ज्यादा जोश की जरूरत होती है। कभी-कभी तो जोश की वजह से आत्मविश्वास बढ़ता है। कुछ भी करने के लिए आत्मविश्वास की जरूरत होती है। अपने पर ही भरोसा नहीं होगा, तो चीजें बिगड़ेंगी ही।

आत्मविश्वास एक चीज से नहीं बहुत-सी चीजों से आता है। हमें अपने आत्मविश्वास पर काम करना पड़ता है। हम जैसे जिंदगी की विभिन्न चीजों पर काम करते हैं, उसी तरह आत्मविश्वास पर भी करना पड़ता है।

रूबिन कहती हैं कि आत्मविश्वास से भी ज्यादा जोश हमारी जिंदगी पर असर डालता है। वह आत्मविश्वास को कम करके नहीं आंकतीं, लेकिन जोश को ज्यादा वजन देती हैं। खासतौर पर टीम के लिए तो जोश की अलग ही भूमिका होती है। असल में आत्मविश्वास महज हमसे ही जुड़ा होता है यानी वह कुल मिलाकर व्यक्तिगत होता है।

अगर आत्मविश्वास है, तो उससे हमें ही फायदा होता है, लेकिन जोश का असर तो पूरे माहौल पर पड़ता है। अगर हम में जोश है, तो पूरी टीम पर ही उसका असर होता है। एक जोशीला शख्स जब कहीं होता है, तो कैसे सब बदल जाता है। वह धीरे-धीरे सबको जोश में बदल देता है। निराश-हताश शख्स मनहूसियत ही फैलाता है। हम जब जोश में होते हैं, तो पूरा माहौल ही खुशनुमा हो जाता है। हमारे भीतर एक किस्म की पॉजिटिव एनर्जी भरने लगती है और उसी एनर्जी की छुअन पूरी टीम भी महसूस करती है।

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