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लजीज खाने को देखकर नहीं टपकेगी लार

लजीज खाने को देखकर नहीं टपकेगी लार

किसी भी लजीज खाने को देखकर लार टपकना स्वाभाविक बात है लेकिन अब वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि मोटापा निरोधक एक दवा की मदद से खानपान विशेषकर उच्च कैलोरी वाले भोजन के बारे में दिमाग की प्रतिक्रिया को बदला जा सकता है।
      
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार इस निष्कर्ष से नई मोटापा निरोधक दवा को विकसित करने में मदद मिल सकती है। यह दावा लजीज खाने को देखते ही मस्तिष्क में होने वाली प्रतिक्रिया को कम कर पाएगी।
      
विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि मोटापा निरोधक दवा सिब्यूट्रेमाइन मस्तिष्क के दो हिस्सों- हाईपोथेलेमस ओर एमीगडाला में दिमाग की प्रतिक्रिया को कम कर देती है। इन दोनों क्षेत्रों को आहार नियंत्रण और खानपान संबंधी आदतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अध्ययन के निष्कर्षों को बुधवार को जर्नल आफ न्यूरोसाइंस में प्रकाशित किया गया।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के मनोचिकित्सा, मानवीय व्यवहार तथा क्लीनिकल तंत्रिका विज्ञान विभाग के प्राध्यापक एवं अध्ययन पत्र के लेखकों में से एक पाल फ्लेचर ने कहा कि फिलहाल कुछ ऐसी दवाएं हैं जो रोगियों का वजन कम करने में मदद करती हैं।

उन्होंने कहा कि किसी भी नई औषधि को विकसित करना महंगा और जोखिमपूर्ण होता है। बहरहाल, हमारे अध्ययन से यह सुझाव मिलता है कि हम कारगर दवा के बारे में बेहतर चयन करने के लिए ब्रेन इमेजिंग और मनोवैज्ञानिक परीक्षण का उपयोग कर पाएंगे।

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