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डीजल को नियंत्रणमुक्त करने का विचार फिलहाल नहीं: मंत्रालय

महंगाई के दबाव को देखते हुए सरकार अभी डीजल को मूल्य नियंत्रण प्रणाली से मुक्त करने के मूड में नहीं है जबकि पेट्रोलियम का खुदरा कारोबार करने वाली कंपनियों को डीजल, रसोई गैस और मिटटी तेल को कम दाम पर बेचने से इस साल करीब 56,000 करोड रुपये की कमाई का नुकसान हो सकता है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री मुरली देवड़ा ने आर्थिक संपादकों के सम्मेलन में कहा डीजल को नियंत्रण मुक्त करने का सिद्धांत निर्णय तो ले लिया गया है लेकिन इसे अमल में लाने में समय लगेगा़, महंगाई को देखते हुये फिलहाल इस दिशा में काई भी निर्णय लेना कठिन है।

   
पेट्रोलियम सचिव एस़ सुंदरेशन ने भी कहा डीजल मूल्यों को नियंत्रणमुक्त करने का मतलब है सामान्य कीमत स्तर में वृद्धि, पर वर्तमान परिस्थितियों में यह उचित नहीं है। उल्लेखनीय है कि थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति सितंबर माह में 8. 62 प्रतिशत रही है जबकि खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति 15 प्रतिशत से उपर बनी हुई है।

सरकार ने किरीट पारिख समिति की सिफारिशों को अमल में लाते हुये जून 2010 में पेट्रोल पूरी तरह नियंत्रणमुक्त कर दिया जिससे उसके दाम 3. 50 रुपये तक बढ़ गये थे। डीजल को भी नियंत्रणमुक्त करने का निर्णय लिया गया लेकिन इसे तुरंत अमल में नहीं लाया गया और उसमें दो रुपये की तात्कालिक वद्धि की गई। राशन के मिटटी तेल में तीन एपये लीटर और रसोई गैस सिलेंडर का दाम 35 रुपये सिलेंडर बढाया गया।  इसके बावजूद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढने से तेल कंपनियों को इस साल 56,000 करोड रुपये से अधिकी कम वसूली रहने का अनुमान है।

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