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खेलने का खुला निमंत्रण, चलो बाहर खेलें

खेलने का खुला निमंत्रण, चलो बाहर खेलें

बचपन है, पर खेलों से दूर। भई, यह क्या बात हुई? एक वक्त था जब खेलते-कूदते बीतते थे बच्चों के दिन। ऐसा भी न था कि देश में पढ़े-लिखे लोगों की कमी थी। पर बच्चों की जिंदगी बहुत सरल थी। आज के बच्चे ज्यादा समय पढ़ाई, फिर सोना, फिर टीवी देखने में लगाते हैं। सारा कंप्रोमाइज बाहर खेलने के वक्त में कटौती करके करते हैं। निक चैनल की वरिष्ठ उपाध्यक्ष व महाप्रबंधक नीना इलाविया जयपुरिया ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि जब हम छोटे थे तो हम शाम से खेलने निकलते थे और मां को आवाज लगाकर बुलाना पड़ता था कि अब 7 बज गए, रात के 8 बज गए, अब लौट आओ। फिर भी आउटडोर गेम्स से हमारा मन न भरता था। निक चैनल ने समय-समय पर चैनल के प्रसिद्ध कैरेक्टर्स जैसे बच्चों के पसंदीदा निंजा हतोड़ी, डोरा आदि से ही बच्चों को कहलवाया है कि पढ़ने के साथ घर से निकलकर खेलना भी बहुत जरूरी है। साथ ही बच्चों व उनके मम्मी-पापा के लिए एक गेम के रूप में फेसबुक पर भी यही संदेश है। हर बॉल पर क्लिक करने पर निक चैनल द्वारा एक रुपया इकट्ठा किया जाएगा। इस पैसे से स्कूलों में आउटडोर गेम्स बांटी जाएंगी, ताकि बच्चे घर से निकलकर खेलें। 30 अक्तूबर 2010 को शाम के वक्त निक चैनल को आधे घंटे के लिए बंद किया जाएगा, बच्चों से कहा जाएगा कि घर से बाहर जाकर खेलो, चैनल तो खेलकर आने के बाद भी देख सकते हो। शाम 5 बजे से 8 बजे तक शिप्रा मॉल में बच्चों को खेलने का खुला निमंत्रण भी है। किसी भी उम्र के बच्चे इसमें हिस्सा लेकर इनाम जीत सकते हैं।

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