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विशाल गेंद में लुड़कने का रोमांच जॉरबिंग

विशाल गेंद में लुड़कने का रोमांच जॉरबिंग

मौज-मस्ती के साथ एडवेंचर का मौका मिले तो तुम्हें कितना आनंद आयेगा। तो आज हम तुम्हें ऐसे ही एक साहस भरे खेल के विषय में बताते हैं, जिसमें फन भी है एडवेंचर भी। सोचो जरा एक बड़े से गोले में बैठ कर लुड़कने में कितना मजा आयेगा। जॉरबिंग ऐसा ही एक एडवेंचर गेम है।

जॉरबिंग एक गेंद जैसे विशाल ‘आर्ब’ अर्थात् गोले में समाकर लुड़कने का खेल है, जिसमें खिलाड़ी प्लास्टिक की एक बहुत बड़ी पारदर्शी गेंद में घुस जाते हैं। उसके बाद वह गेंद के जैसा गोला ढलान पर लुड़कता जाता है। इस राइड में खिलाड़ी गोले में घूमने को एंजॉय करते हैं, जिसमें उन्हें जबरदस्त रोमांच होता है। तुम्हें जॉरबिंग के विषय में कुछ और बातें बताते हैं। जॉरबिंग का गोला दो गेंदों से मिलकर बना होता है। बाहरी गोले का व्यास तीन मीटर तक होता है, जबकि अंदर की बॉल का व्यास दो मीटर तक हो सकता है। इनके मध्य वायु की परत के लिए लगभग 50-60 सेंटीमीटर का स्थान होता है। मध्य में एक या दो लोगों के लिए सुरंगनुमा प्रवेशमार्ग बना होता है। प्लास्टिक की बॉल राइड के दौरान ‘शॉक-एब्जॉरबर’ का काम करती है, जिससे राइडर को बंपिंग या झटकों का सामना नहीं करना पड़ता। यह साहसिक गतिविधि प्राय: किसी पहाड़ी ढलान पर कराई जाती है। खासकर ऐसे स्थान पर, जहां ज्यादा तिरछे ढलान न हों। यह जान लो कि जॉरबिंग राइड में किसी एम्यूजमेंट पार्क की राइड से ज्यादा थ्रिलिंग होती है।

वैसे तो जॉरबिंग एक ‘एक्सट्रीम स्पोर्ट’ है, लेकिन इसकी लोकप्रियता को देखते हुए आज इसे ‘लो-लेवल’ पर आयोजित कर मस्ती भरा खेल बना दिया गया है। जबरदस्त फन और थ्रिल के कारण कई स्थानों पर जॉरबिंग एक पर्यटन एक्टिविटी बन चुकी है। इसी कारण कई जगह मैदानी इलाकों में भी लकड़ी या मैटल के बनावटी ‘रैम्प’ बनाकर जॉरबिंग कराई जाती है। वैसे आजकल जॉरबिंग समतल मैदान में भी की जाती है, लेकिन उसमें राइडर को स्वयं जॉर्ब को रोल करने के लिए दबाव बनाना एवं नियंत्रित करना होता है। सामान्यत: फन के लिए की जाने वाली राइड 200 मीटर तक होती है, लेकिन एडवेंचरस लोग 500 से 700 मीटर तक ही राइड करते हैं। इसके निर्माण के अलावा इसके परिचालन में भी राइडर की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है।

हमारे देश में जॉरबिंग का आनंद लेना हो तो तुम मनाली जा सकते हो। मनाली के निकट स्थित सोलांग घाटी सर्दियों में विंटर गेम्स के लिए प्रसिद्ध है। उस समय यहां स्कीइंग के शौकीन बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। गर्मी आते-आते यहां की बर्फ पिघल जाती है तो ढलानों पर मखमली घास आ जाती है। वह समय यहां जॉरबिंग की शुरुआत का होता है। अप्रैल के बाद मनाली आने वाले सैलानी सोलांग घाटी के प्राकृतिक सौन्दर्य के अलावा यहां आकर इस एडवेंचर गेम का आनंद भी लेते हैं। सोलांग के ढलान बिल्कुल भी खतरनाक नहीं हैं। इसलिए नौसिखियों के लिए यह जॉरबिंग का आदर्श डेस्टिनेशन बन चुका है। यहां एक जॉरबिंग राइड 150 मीटर से 200 मीटर के मध्य होती है। जानते हो इतनी दूरी में ही पारदर्शी गेंद के अंदर बंद होकर लुड़कने घुमड़ने में खूब मजा आता है। धीरे-धीरे यह खेल देश के अन्य पर्यटन स्थलों पर भी शुरू किये जाने के प्रयास चल रहे हैं।
विदेशों में यह खेल बहुत समय से प्रचलित है। लेकिन हमारे देश में जॉरबिंग कुछ वर्ष पूर्व ही शुरू हुआ है। वैसे इसकी शुरुआत न्यूजीलैंड में हुई थी। इस गेम को ‘स्फीयरिंग’ भी कहते हैं। अनेक देशों में जॉरबिंग प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं, जिनमें भाग लेने वाले नये-नये रिकॉर्ड बनाने का प्रयास करते हैं। तुम्हें बता दें कि विश्व में जॉरबिंग इतनी लोकप्रिय है कि ‘जार्ब्स’ को 2014 में रूस के ‘सोची’ नामक स्थान पर होने वाले विंटर ओलंपिक्स का प्रतीक चिह्न् बनाया गया है।

जॉरबिंग में बरती जाने वाली सावधानियां

जॉरबिंग राइड शुरू करने से पूर्व गाइड के सुरक्षा निर्देशों को ध्यान से सुनें।
जार्ब में उसके दिशा-निर्देशों के अनुसार ही प्रवेश करें।
आरम्भ में छोटी एवं कम ढलवां मैदान वाली राइड करें।
शुरू में जॉरबिंग को देखकर एंजॉय करना चाहिए। काफी अभ्यास के बाद फास्ट राइड जोन में राइड करनी चाहिए।

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