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दो टूक (27 अक्टूबर, 2010)

आज के खुले समाज में बच्चों के लिए कोई कोना आप बंद नहीं रख सकते। ऐसे में मां-बाप, अभिभावक का दायित्व बढ़ जाता है।

मुश्किल यह है कि बढ़े संसाधनों और शानदार तकनीकी उन्नति के इस काल में लोगों के पास समय छोड़कर सबकुछ है।

वैसे मामला समय की कमी का नहीं, प्राथमिकता का है। यदि किसी चीज के लिए समय निकालना चाहेंगे तो निकाल लेंगे। बच्चे सबसे अधिक कीमती हैं। जो आपके लिए सबकुछ हैं, उनके पैर में वो ताकत दें जो जिंदगी की राह पर मजबूती से टिक पाएं।

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  • Web Title:दो टूक (27 अक्टूबर, 2010)