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राष्ट्रमंडल खेलों के भ्रष्टाचार से भारत की छवि खराब

राष्ट्रमंडल खेलों के भ्रष्टाचार से भारत की छवि खराब

भ्रष्टाचार के कारण बदनाम हुए राष्ट्रमंडल खेलों का असर देश की छवि पर भी पड़ा है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की नई सूची में वह तीन पायदान लुढ़क कर 87वें स्थान पर आ गया है।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल का कहना है कि राष्ट्रमंडल खेलों में भ्रष्टाचार की रपटों का असर देश में भ्रष्टाचार को लेकर आम धारणा पर पड़ा है। संस्थान की करप्शन परसेप्शन इंडेक्स रपट में 178 देशों के सार्वजनिक क्षेत्रों को शामिल किया गया है। भारत इस सूचकांक में पिछले साल 84वें स्थान पर था।

इस साल दुनिया में भ्रष्टाचार के लिहाज से भारत 3.3 ईमानदारी अंक के साथ 87वें स्थान पर है। इसमें चीन 78वें स्थान पर यानी भारत से बेहतर स्थिति में है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया के अध्यक्ष पीएस बावा ने कहा कि भारत के ईमानदारी अंक तथा पायदान दोनों घटे हैं जो खेदजनक व चिंताजनक है। यह लगता है कि दक्ष प्रशासकों के बावजूद भारत में प्रशासन का स्तर नहीं सुधरा है।

उल्लेखनीय है कि यह इंडेक्स शून्य से 10 अंक के आधार पर निर्भर करता है और इसमें भ्रष्टाचार तथा भ्रष्ट गतिविधियों पर नियंत्रण की सरकार की क्षमता को ध्यान में रखा जाता है। रपट में कहा गया है कि दिल्ली में हाल ही में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में व्यापक भ्रष्टाचार की रपटों का नकारात्मक असर देश की छवि पर पड़ा है। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग, प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग तथा कैग सहित अनेक संस्थाएं इन खेलों में भ्रष्टाचार की जांच में जुटी हैं।

संस्थान की रपट में दुनिया भर में सबसे कम भ्रष्टाचार वाले तीन देशों में क्रमशः डेनमार्क, न्यूजीलैंड तथा सिंगापुर को माना गया है।

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