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खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने से मुद्रास्फीति पर दबाव

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की दो नवंबर को घोषित होने वाली तिमाही मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रधान ब्याज दरों में 25 अंक की बढोतरी की जा सकती है।
 
आरबीआई के उप गवर्नर सुबीर गोकर्ण ने मंगलवार को यहां कहा कि खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें मुद्रास्फीति और ब्याज दरों पर दबाव बनाए रखेगीं। ऐसी वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे है जिनका विकल्प नहीं है जबकि दूसरी वस्तुओं के दाम स्थिर बने हुई है। इससे मुद्रास्फीति की दर पर दबाव बन गया है। अक्टूबर की शुरूआत में खाद्य मुद्रास्फीति की दर 15.53 प्रतिशत दर्ज की गई थी। उन्होंने कहा कि दालों का उत्पादन मांग के अनुरूप नहीं हो रहा है।

जानकारों का कहना है कि आरबीआई तिमाही मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रधान बयाज दरों में बढोतरी की घोषणा कर सकता है। सरकार ने दिसंबर तक मुद्रास्फीति की दर छह प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि बढ़ती आय के कारण लोगों का खानपान बदला है और प्रोटीन और पोषक पदार्थों की मांग में इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि दालों की आपूर्ति आयात के अलावा अनुबंध कृषि से भी की जा सकती है।

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