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हर साल दस लाख बच्चों को सस्ती किताबें

देश में हर साल दस लाख विशेषकर गरीब एवं वंचित बच्चों में किताबें पढ़ने की आदत डालने के लिए सभी महत्वपूर्ण भारतीय भाषाओं मे सस्ती पुस्तकें छापने के लिए मंगलवार को एक करार किया गया।
 
न्यूनतम दो रुपए से अधिकतम 32 रुपए की पुस्तकें हिन्दी, अंग्रेजी के अलावा उर्दू, पंजाबी, बंगला तेलुगु, तमिल, मराठी, कन्नड उडिया और आदि में छापी जाएंगी। शिक्षा के क्षेत्र में वर्षों से सक्रिय गैरसरकारी संगठन "प्रथम"  ने आज अंग्रेजी के प्रमुख प्रकाशक, पियर्सन, लांगमैन के साथ एक करार पर हस्ताक्षर किए। प्रथम की अध्यक्ष रोहिणी निलेकनी तथा पियर्सन एजुकेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विवेक गोयल ने करार पर हस्ताक्षर किए।

 गोयल तथा निलेकनी ने पत्रकारों को बताया कि देश के हर बच्चों के हाथ में एक किताब होनी चाहिए विशेषकर गरीबों तथा वंचित बच्चों के हाथ में। इसके लिए हर साल हम दस लाख बच्चों के हाथ में पुस्तकें मुहैया कराएंगे। करार के तहत पियर्सन कम्पनी अपनी प्रति पुस्तक की बिक्री का 50 पैसा "प्रथम को देगी और इस तरह जमा होने वाली राशि से, प्रथम एलजीओ दस लाख बच्चों को पुस्तकें उपलब्ध कराएगा।
 
उन्होंने बताया कि  ये पुस्तकें "प्रथम" की पुस्तकालयों के माध्यम से बच्चों को प्रदान की जाएंगी और इस काम में पंचायतों तथा राज्य सरकारों की मदद ली जाएगी। गत छह साल में प्रथम ने एक करोड़ 20 लाख बच्चों मे पुस्तकें पढने की आदत डाली है और 11 भारतीय भाषाओं में 200 पुस्तकें प्रकाशित की हैं।

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