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सुरक्षा क्षेत्र में सुरक्षित करियर

सुरक्षा की अहमियत से इनकार नहीं किया जा सकता। चाहे व्यक्ति की सुरक्षा हो, किसी सामान की, इमारत की या सूचना प्रौद्योगिकी की, हर एक जगह किसी न किसी रूप में सुरक्षा की जरूरत होती है। चाहे निजी क्षेत्र हो या सरकारी, आग लगने की घटना हो या फिर किसी तरह के आतंकवादी हमले की आंशका, रेजिडेंशियल सोसायटीज की सुरक्षा हो या वित्तीय संस्थानों में लाखों करोड़ों रुपए रकम की लेन-देन की सुरक्षा। सुरक्षाकर्मियों की जरूरत को कम नहीं आंका जा सकता। 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों के बाद देश के सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में निजी सुरक्षा कर्मियों की आवश्यकता को महसूस की गई, लेकिन हर जगह सरकार की तरफ से सुरक्षा नहीं दी जा सकती, इसलिए निजी सुरक्षाकर्मियों की जरूरत है।
अब तो कई संस्थानों में बाकायदा सिक्योरिटी स्टडीज पर कोर्स भी संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान समय में देश में 15 हजार से ज्यादा सिक्योरिटी कंपनियां हैं, जिनके माध्यम से करीब 60 लाख सिक्योरिटी गार्डस विभिन्न सरकारी और निजी संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यह इंडस्ट्री 25 प्रतिशत सालाना की दर से वृद्धि कर रहा है। सुरक्षाकर्मियों की बढ़ती मांग को देखते हुए सीएपीएसआई (सेंट्रल एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट सिक्योरिटी इंडस्ट्री) ने भविष्य में इस इंडस्ट्री के 40 प्रतिशत वार्षिक की रफ्तार से बढ़ने का अनुमान लगाया है।

प्रशिक्षण कितना जरूरी
जब प्रशिक्षण की बात आती है तो हम हमेशा उसके साथ देखते हैं करियर आस्पेक्ट। उसमें करियर कहां है। आपदा प्रबंधन में कोई व्यक्ति सिर्फ निजी लाभ, निजी काम के लिए या निजी स्तर पर प्रबंधन नहीं सीखता। उसमें कॅरियर के लिए भी राहों को तलाशता है। इसी तरह है सुरक्षा प्रबंधन। इसमें विशेष प्रशिक्षित लोग अलग-अलग समय के हिसाब से लोगों को सुरक्षा प्रबंधन के गुर सिखाते हैं। इस प्रबंधन में वीआईपी सुरक्षा की बात हो सकती है। विशेष स्थलों की सुरक्षा की बात हो सकती है और किसी मुद्दे की गहनता को लेकर सुरक्षा प्रबंधन की बात हो सकती है। जाहिर है जब सुरक्षा की जरूरत भिन्न है तो उसे सिखाने के प्रकारों में भी भिन्नता आएगी। उनके विशेषज्ञों में भिन्नता होगी। सुरक्षा प्रबंधन की सिर्फ बात करने से ही कुछ नहीं होगा। हमें इसके लिए यह भी तलाशना होगा कि आखिर किस तरह की संस्था से करियर आस्पेक्ट को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा मानकों वाले प्रबंधन में डिप्लोमा हासिल किया जाए। इसका प्रशिक्षण रेगुलर और डिस्टेंस एजुकेशन के जरिए भी दिया जाता है।
वैसे ज्यादातर लोगों को लगता है कि सुरक्षा एजेंसियों से जुड़कर हर कोई सुरक्षाकर्मी बन सकता है, लेकिन यह सच नहीं है। दरअसल, भारतीय निजी सुरक्षा एजेंसीज रेगुलेशन एक्ट-2005 के तहत सिक्योरिटी एजेंसी स्थापित करने के लिए कड़े मानदंड बनाए गए हैं। इसके अलावा, सिक्योरिटी गार्ड बनने के लिए कम से कम 160 घंटे का प्रशिक्षण लेना जरूरी है। इसके अलावा, उसका भारतीय नागरिक होना जरूरी है।

कौन-कौन से कोर्स?
सुरक्षा प्रबंधन में कोर्स अलग-अलग तरह के हैं। इनमें विविधता इसकी अवधि और स्वरूप को लेकर है। एक साल के रेजिडेंशियल प्रोग्राम के तहत खुदरा सुरक्षा विशेषज्ञता में गहन प्रशिक्षण, औद्योगिक सुरक्षा, विमानन सुरक्षा, कॉरपोरेट सुरक्षा आदि की ट्रेनिंग दी जाती है। वरिष्ठ रोजगार सलाहकार आरएस नेहरा के मुताबिक सुरक्षा क्षेत्र में रोजगार पाने के लिए कोई भी कोर्स मददगार साबित हो सकता है। डिप्लोमा इन सिक्योरिटी मैनजमेंट, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन सिक्योरिटी मैनेजमेंट, और सर्टिफिकेट इन सिक्योरिटी मैनजमेंट, एडवांस सर्टिफिकेट कोर्स मौजूद है। इस कोर्स की अवधि है तीन माह से एक साल। कोर्स के दौरान इंट्रोडक्शन टू सिक्योरिटी, फिजिकल सिक्योरिटी, सिक्योरिटी ऑटोमेशन, प्राइवेट सिक्योरिटी के कानूनी पहलुओं के अलावा, इंटेलिजेंस, इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी, एविएशन सिक्योरिटी, वीआईपी प्रोटेक्शन, रिटेल सिक्योरिटी का प्रशिक्षण प्रमुख रूप से दिया जाता है।

योग्यता
इस डिप्लोमा कोर्स के लिए खास उम्र और शिक्षा की जरूरत होती है। अप्लाई करने वाले का स्नातक होना जरूरी है। बीस से 27 वर्ष के आयुवर्ग के बीच के स्नातक युवा अप्लाई कर सकते हैं। एनसीसी के बी और सी सर्टिफिकेट धारकों को विशेष रियायत दी जाती है। सिक्योरिटी स्टडीज में डिप्लोमा और पीजी डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और एडवांस्ड कोर्स भी मौजूद हैं। 6 माह से लेकर 4 वर्ष तक है। सर्टिफिकेट कोर्स में एडमिशन लेने के लिए जहां न्यूनतम शैक्षिक योग्यता केवल दसवीं पास है, वहीं एडवांस्ड सर्टिफिकेट कोर्स के लिए 12वीं पास होना जरूरी है। यह कोर्स हिन्दी और अंग्रेजी दोनों में उपलब्ध है। इग्नू में पत्रचार माध्यम से यह कोर्स चलाया जाता है।

आमदनी
शुरुआती वेतन डिग्री, डिप्लोमा एवं पीजी डिप्लोमा के मुताबिक मिलता है या फिर तजुर्बे के मुताबिक उसका वेतन तय किया जाता है। वैसे शुरुआती सैलरी 8 से 10 हजार तक मिलती है, लेकिन यह वेतन इस बात पर तय होता है कि आप किस स्तर की कंपनी ज्वाइन करते हैं या फिर कंपनी कितनी बड़ी है या कितने वीआईपी को अपनी सेवा दे रही है। इसमें पदोन्नति के भी खूब अवसर हैं जैसे आप सिक्योरिटी सुपरवाइजर और सिक्योरिटी मैनेजर भी बन सकते हैं।

कहां कहां हैं अवसर
रेजिडेंशियल सोसायटीज, मॉल्स, मल्टीप्लेक्स, वित्तीय संस्थानों में बड़ी तादाद में इससे जुड़े अवसर हैं, जहां सप्ताह के सातों दिन और चौबीस घंटे इनकी जरूरत को महसूस किया जाता है, ताकि उस संस्थान पर दिन-रात सुरक्षा बहाल रहे। इसके लिए किसी भी नए प्रोजेक्ट में बड़ी संख्या में सिक्योरिटी कर्मियों की जरूरत पड़ती है। अब दिल्ली मेट्रो प्रोजेक्ट को ही लें। यहां ट्रैफिक संभालने से लेकर मेट्रो स्टेशनों पर भीड़ को नियंत्रित करने तक का काम सुरक्षाकर्मियों की जिम्मेदारी है।

प्रमुख संस्थान
- इग्नू, नई दिल्ली
- इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट एंड फायर सेफ्टी, मोहाली, पंजाब
- देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, इंदौर, मध्यप्रदेश
- इसके साथ ही देश के कई विश्वविद्यालयों में सुरक्षा क्षेत्र संबंधी शॉर्टटर्म कोर्स कराए जा रहे हैं।

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