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कब्जे के खिलाफ कोरस

हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया से आने वाली यह सबसे खुश करने वाली खबर है। ठीक तौर पर यह खबर पश्चिम एशिया से नहीं आई है, बल्कि उसके बारे में है। पोप बेनेडिक्ट -16वें की अध्यक्षता में हुई बैठक में पश्चिम एशिया के कैथोलिक पादरियों ने संयुक्त राष्ट्र से यह अनुरोध किया है कि वह अरब की जमीन से इजराइल का कब्जा हटवाए। इस बैठक के बाद बिशपों ने अपने अंतिम बयान में कहा है, ‘पश्चिम एशिया की जनता मांग करती है कि संयुक्त राष्ट्र इस समस्या के शांतिपूर्ण समाधान की कोशिश करे और अरब भूमि पर कब्जे को खत्म करने के लिए आवश्यक कानूनी कदम उठाए।’ प्रस्ताव में कहा गया है कि इससे फलस्तीनी लोगों को एक स्वतंत्र और संप्रभु देश प्राप्त करने में सुविधा होगी, जहां वे गरिमा और सुरक्षा के साथ रह सकेंगे।
खलीज टाइम्स, संयुक्त अरब अमीरात

उम्मीद की वजहें
अफगानिस्तान में पिछले महीने हुए संसदीय चुनावों में करीब एक चौथाई मतपत्रों को धोखाधड़ी के कारण खारिज कर दिया गया। यह एक अच्छी बात है। हालांकि जिस पैमाने पर चुनाव में धांधली करने की कोशिश हुई वह तो चिंताजनक है, फिर भी उम्मीद की वजह यह है कि चुनाव अधिकारी अब भी अपने काम को गंभीरता से लेते हैं। इससे यह भी लगता है कि पूरे अफगानिस्तान ने अपने को व्यवस्थागत भ्रष्टाचार के आगे समर्पित नहीं किया है। अफगानिस्तान के चुनावों में भ्रष्टाचार वहां की हकीकत हो गया है। पिछले साल के राष्ट्रपति चुनावों में अधिकारियों ने व्यापक भ्रष्टाचार के प्रति आंखें बंद कर ली थीं। इनमें ज्यादातर वोटों का मकसद करजई को फिर वोट हासिल करने से बचाना था। जब इस मतदान की बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय निंदा हुई, तो वहां के अधिकारियों की आंखें खुलीं।
द जापान टाइम्स

 

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