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पाश्चात्य जीवन शैली ने बढ़ाया स्तन कैंसर

पाश्चात्य जीवन शैली से भारत में महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले बढ़े हैं। बाबा राघवदास मेडिकल कालेज में चल रहे दो दिवसीय यू.पी. पैथाकान 2010 अधिवेशन में अमरीका के जाने माने कैंसर चिकित्सक बिलाल अहमद ने कहा कि खानपान एवं जीवन शैली के बदलाव से भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले बढे हैं। अहमद के अनुसार हालांकि अभी यह संख्या अमरीका से कम है।

उन्होंने कहा कि स्तन कैंसर बढने का कारण देर से शादी, देर से गर्भधारण और शिशु को स्तनपान नहीं कराना है। इससे स्तन कैंसर की सम्भावना बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश भारत में देर से रोग की पहचान होने के कारण इलाज में दिक्कतें आती हैं। डा. बिलाल ने कहा कि अमरीका में भारत की तुलना में हालांकि मरीजों की तादाद अधिक है लेकिन वहां समय से रोग का पता चल जाने से रोगी ठीक हो जाती है। उन्होंने कहा कि अमरीका में 40 साल की उम्र के बाद महिलाएं स्वयं जांच कराती है जबकि भारत में ऐसा नहीं है। नियमित जांच कराए तो स्तन कैंसर से बचा जा सकता है। अहमद ने कहा कि जिनके परिवार में बीमारी आनुवांशिक हो उन महिलाओं को 23 वर्ष की उम्र में ही जांच करानी चाहिए। मैमोग्राफी से बीमारी का पता चल सकता है।

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