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देश के लिए इतना तो कीजिए

एक सामान्य नागरिक अपने देश के लिए क्या कर सकता है? यह प्रश्न अक्सर हवा में उछाला जाता है। मुझे लगता है कि हम  चाहें, तो अपने मुल्क की बेहतरी के लिए बहुत कुछ ऐसा कर सकते हैं, जिसके लिए न तो हमें धन चाहिए और न ही किसी से अनुमति ही। हमारा ही दर्शन है कि जहां स्वच्छता होती है, वहां लक्ष्मी का वास होता है। यही वजह है कि दीपावली के अवसर पर लोग अपना घर अच्छी तरह से साफ करते हैं। यदि हम सब अपने पूरे देश को घर जैसा साफ-सुथरा रखेंगे, तो कहने की जरूरत नहीं कि हमारा देश आर्थिक रूप से भी उस पायदान पर होगा, जिसका सपना हम सब देखते हैं। हम चाहें तो अपने महानगरों, शहरों, कस्बों और गावों को साफ-सुथरा बनाने में भागीदार बन सकते हैं। 
सुभाष लखेड़ा, न्यू  जर्सी       

यह विराट का जलवा है
वाईजैग में देश के युवा क्रिकेटरों ने जो धमाका किया है, उससे भारतीय क्रिकेट की एक नई पहचान बनी है। टीम के युवा भारत को जीत दिलाने की जिद ठान चुके हैं। कंगारुओं के खिलाफ 290 रनों का पीछा करना और वह भी तब, जब सलामी बल्लेबाज जल्द ही पवेलियन लौट चुके हों, वाकई काबिले तारीफ है। मैच के पहले धोनी ने कहा था कि वाईजैग में हमेशा एक भारतीय खिलाड़ी ऐतिहासिक पारी खेल जाता है, हो सकता है कि इस मुकाबले में भी ऐसा ही हो। कप्तान के अनुमान को विराट कोहली ने सही साबित कर दिया। विश्व कप से पहले हो सकता है कि भारतीय टीम में प्रयोग होते रहें, लेकिन जिस अंदाज में टीम इंडिया इस वक्त खेल रही है, उसे देखते हुए कहना होगा कि वह महाकुंभ में जलवा दिखाएगी।
अजय कुमार राणा


सबसे भ्रष्ट कर्नाटक
कर्नाटक के राजनेताओं की निर्लज्जता की खबरें रोज-रोज पढ़ने-देखने को मिल रही हैं, लेकिन आश्चर्य की बात है कि कोई सामाजिक संगठन वहां इन घटनाओं का संज्ञान नहीं ले रहा। राजनीतिक दलों की तो बात फिर भी समझ में आ सकती है कि चाल, चरित्र और चेहरा जब खराब होता है, तब वह घिनौना हो जाता है। और लगभग सभी पार्टियों का एक-सा हाल है, पर क्या कर्नाटक के सामाजिक संगठनों का भी पतन हो गया है? वहां क्या कोई अन्ना हजारे नहीं है?
मान्या सिंह, स्वाति अपार्टमेंट, पटपड़गंज, दिल्ली     

अब भी सड़ता अनाज
पहले मंडियों में अनाज सड़ा, क्योंकि सरकारी खरीद एजेंसियों के पास उसे रखने के लिए जगह नहीं थी। पिछले महीने तक जबर्दस्त बारिश होने से मंडियों में खुले में पड़ा अनाज सड़ गया था। अकेले पंजाब और हरियाणा में वर्षा से करीब 70 हजार टन गेहूं सड़ गया, अब यही हालत धान की फसल की हो रही है। आंध्र प्रदेश में इस बार धान की रिकॉर्ड फसल हुई है, किसान धान को मंडियों में ले आए हैं, पर सरकार ने धान की खरीदारी रोक दी है, क्योंकि उसके गोदाम पहले ही गेहूं से अटे पड़े हैं, अब वह धान की फसल कहां रखे। अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति शोध संस्थान ने वैश्विक भुखमरी सूचकांक पेश किया है, जिसमें भूख के मामले में 84 देशों में भारत 62वें स्थान पर है। क्या उत्पादन और उपभोग के बीच की यह खाई कोई अर्थशास्त्र नहीं पाट सकता?
ओमप्रकाश प्रजापति, ई-4, नंदनगरी, दिल्ली-93

संभल के नेताजी
बिहार में इस वक्त विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। राजनेता जनता को लुभाने में लगे हैं। मगर एक सवाल मुंह बाए खड़ा रहता है कि आखिर जिन्हें हम पांच साल के लिए चुनते हैं, वे पांच वर्ष के अंत में ही हमारी तकलीफ टटोलने क्यों आते हैं? प्रधानमंत्री पिछले सप्ताह बिहार के चुनावी दौरे पर गए और राज्य के मुख्यमंत्री पर आरोप लगाकर वापस आ गए कि हमने बिहार की जनता के लिए करोड़ों रुपये दिए, मगर राज्य सरकार जनता तक वे रुपये नहीं पहुंचा सकी। प्रधानमंत्रीजी, आपने अगर बिहार की जरूरतमंद जनता के लिए धन दिए थे, तो मुख्यमंत्री से पहले क्यों नहीं पूछा कि जनता का पैसा कहां है? इस वक्त यह कहने का क्या मतलब? जनता इन उलाहनों और शिकायतों की हकीकत जानती है। इसलिए मतदाताओं को अपने कार्यक्रम बताइए, दोष मत मढ़िए।
मोहम्मद असफहानी खान, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली

फिर सो गए क्या?
कॉमनवेल्थ गेम्स की सफलता पर पूरे भारत के लोगों को खुशी है, किंतु क्या इसके शानदार आगाज और यादगार अंजाम ने लोगों को भ्रष्टाचार की अनदेखी करने के लिए प्रेरित किया है? यदि नहीं, तो लोग सो क्यों रहे हैं? मीडिया अब भ्रष्टाचार के मामलों को क्यों नहीं उछाल रहा? क्या मीडियाकर्मी और लोग इतनी जल्दी भूल गए कि हमारी मेहनत की कमाई की बड़े पैमाने पर बंदरबांट हुई है। इसलिए अब भी लोगों को और मीडिया को मिलकर इस आयोजन की आड़ में लूट मचाने वालों को उनके अंजाम तक पहुंचाना होगा।
सुनीता त्यागी

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