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77 वर्षीय चंद्रो तौमर बनी शूटरों के लिए प्ररेणास्रोत

भाई में किसी की गुरू नहीं हूं। मै तो केवल बच्चों के लिए प्रेरणास्नोत हूं। इन बच्चों का गुरु तो ऊपर वाला है। यह कहना है कि सिरसा की टीम के साथ आई 77 वर्षीय चंद्रो तौमर का। उक्त बुजुर्ग अपने पारंपरिक लिबास में शूटरों की टीम के साथ बेहद अलग दिखाई पड़ रही थीं ।


प्यारी दादी के रूप में चर्चित चंद्रो तौमर अपने आपको बेहद भाग्यशाली मानती है। कि उन्हें इतने अधिक प्यारे पोता-पोती मिले है। जिन्हें जीवन में आगे बढ़ाने के लिए उन्हें प्रेरणा देने का मौका मिल रहा है। उनका कहना है कि शूटिंग का शौक उन्हें 56 साल की उम्र में आया। उन्होंने बताया कि उनकी पोती सैफाली तौमर ने जब शूटिंग सिखनी शुरू की तो उसे देखकर उन्हें भी शौक हो गया। इसके बाद उन्होंने भी निशानेबाजी करनी शुरू कर दी। कुछ समय पहले इन बच्चों ने उन्हें अपना प्रेरणास्रोत बना लिया। वह बताती है कि अब उनका हाथ काम नहीं करता, लेकिन आज भी शूटिंग कर सकती है। इस मौके पर रतन कांवेंट स्कूल की प्रिसिंपल सरोज मलिक ने बताया कि चंद्रो ताई सिरसा के ही नहीं पूरे देश के शूटरों के लिए प्ररेणास्रोत है। उनकी उम्र देखकर सहसा अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है कि इस उम्र वह इतना अच्छा निशाना भी लगा सकती है।

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