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कल्याण ने भाजपा से नाता तोड़ा

मुलायम सिंह यादव और कल्याण सिंह की नई दिल्ली में हुई मुलाकात में जो स्क्रिप्ट लिखी गई है उसका पहला मंचन लखनऊ में मंगलवार को हो गया। कल्याण सिंह ने भाजपा को अलविदा कर दिया। करीब पांच साल पहले लोकसभा चुनावों से एन पहले वे भाजपा में लौटे थे। यह संयोग ही है कि लोकसभा चुनावों से ठीक पहले उन्होंने नाता तोड़ लिया। कल्याण ने जब भी भाजपा से बगावत की है सपा को फायदा हुआ है। चुनावी नतीजे इसके गवाह रहे हैं। यही वजह है कि कल्याण सिंह के भाजपा से अलग होने पर सपा में जोश है। सपा सूत्रों के मुताबिक यह दोस्ती अभी और बढ़ेगी। कल्याण सिंह सपा के समर्थन से एटा और उनके पुत्र राजवीर बतौर सपा प्रत्याशी कन्नौज से चुनाव लड़ सकते हैं। मुलायम ने राजवीर के लिए सीट की पेशकश भी की है जिस पर कल्याण उनके प्रति आभार जता चुके हैं। समझा जा रहा है कि कल्याण ने बुलंदशहर समेत कुछ और सीटों पर भी दिलचस्पी दिखाई है। अगले एक-दो दिनों में तस्वीर साफ हो जाएगी। भले ही कल्याण सिंह ने कहा है कि वे किसी पार्टी में शामिल नहीं हो रहे लेकिन इसके पूर संकेत हैं कि यूपी में पिछड़े वर्गो खास तौर पर लोध समुदाय के इस बड़े नेता की अघोषित चुनावी दोस्ती पिछड़ों के एक और कद्दावर नेता मुलायम सिंह यादव से होगी। कल्याण का साथ पाकर सपा के लिए जहाँ अपनी मुख्य राजनीतिक दुश्मन बसपा को और कड़ी टक्कर देने की सूरत बनेगी वहीं कल्याण के लिए सपा का साथ भाजपा से हिसाब बराबर करने का मौका मुहैया करगा। दोनों के फौरी लक्ष्य जरूर अलग होंगे लेकिन इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि पिछड़ों का यह ध्रुवीकरण मजबूत राजनीतिक ताकत के रूप में उभरगा। भाजपा से नाता तोड़ने की घोषणा कल्याण सिंह ने मंगलवार दोपहर अपने आवास पर आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में की। 2004 में अपनी भाजपा में वापसी को सबसे बड़ी भूल करार देते हुए एक ज्योतिषी की तरह उन्होंने यह भविष्यवाणी भी कर दी कि उ.प्र. में भाजपा एक कम या ज्यादा पांच सीटें ही मिल पाएंगी। पूर देश में भाजपा को 118 सीटें मिलेंगी। भाजपा अपनी इस बर्बादी के लिए स्वयं जिम्मेदार है।ं

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