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राजेंदर कुमार की एशियाई खेलों के तमगे पर नजर

दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान कुश्ती में सोना जीतने वाले राजेंदर कुमार जब कहते हैं कि इन खेलों ने उनकी जिंदगी बदल दी तो यह बात उन तमाम नए पदकवीरों पर भी खरी उतरती दिखती है, जो खुद को साबित करने के लिए बढ़िया मौके की तलाश में थे।

राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्णिम सफलता से उत्साहित यह भारतीय पहलवान एशियाई खेलों की तैयारी में जमकर पसीना बहा रहा है, क्योंकि वह जानता है कि चीन में अगले महीने होने वाले इस खेल महाकुंभ में खिताब के लिए मुकाबला कड़ा होने वाला है। इंदौर से कोई 110 किलोमीटर दूर रतलाम में पश्चिम रेलवे के टिकट संग्राहक (टीसी) के रूप में काम करने वाले राजेंदर इन दिनों सोनीपत में हैं। वह एशियाई खेलों की तैयारी के लिए वहां लगे शिविर में हिस्सा ले रहे हैं।

उन्होंने फोन पर कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद मेरी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। पहले मुझे कोई जानता नहीं था। अब कई लोग जानने लगे हैं। राजेंदर कुमार ने राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान कुश्ती के ग्रीको रोमन वर्ग (55 किलोग्राम) में छह अक्टूबर को खिताबी मुकाबले में पाकिस्तानी पहलवान अजहर हुसैन को 11-0 से पीटा था और स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया था।

यह बात कम ही लोग जानते होंगे कि यह भारतीय पहलवान अपनी इस स्वर्णिम सफलता से हफ्ते भर पहले तक टाइफाइड से जूझ रहा था। उन्होंने बताया कि टाइफाइड से उबरने के लिए मैंने डॉक्टरों की सलाह पर 22 से 29 सितंबर के बीच आराम किया। इस दौरान मेरा आत्मविश्वास थोड़ा कम हो गया, लेकिन स्वस्थ होने के बाद मैंने अपने हौसले को समेटा और जीत के भरोसे के साथ रिंग में उतरा।

राजेंदर कुमार की नजर अब एशियाई खेलों पर है। वह बताते हैं, मैं एशियाई खेलों के लिए राष्ट्रमंडल खेलों के मुकाबले ज्यादा तैयारी कर रहा हूं। एशियाई खेलों में मेरी भिड़ंत उन पहलवानों से होने वाली है, जो आला अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में खिताब जीत चुके हैं। उन्होंने कहा कि मैं एशियाई खेलों में पदक जीतने के भरोसे के साथ रिंग में उतरूंगा। लेकिन फिलहाल इस बारे में कोई दावा नहीं कर सकता कि यह पदक कौन से रंग का होगा।

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  • Web Title:राजेंदर कुमार की एशियाई खेलों के तमगे पर नजर