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एशियाई स्थिरता के लिए भारत-जापान संबंध महत्वपूर्ण: पीएम

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एशिया के तीन देशों की यात्रा पर रवाना होने से पहले कहा कि इस महाद्वीप में स्थिरता के लिए भारत और जापान के बीच बढ़ती सामरिक साझेदारी बेहद महत्वपूर्ण है।

सिंह रविवार सुबह जापान के लिए रवाना हो गए। वह टोक्यो में तीन दिनों तक रहेंगे और वहां जापान के साथ वार्षिक बैठक में शिरकत करेंगे। इसके बाद वह मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर के लिए रवाना होंगे। यात्रा के आखिरी पड़ाव में वह वियतनाम जाएंगे।

उन्होंने अपने बयान में कहा कि वह मलेशिया के साथ आर्थिक एकीकरण के और मजबूत होने की उम्मीद करते हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा कि वियतनाम के साथ भारत की सामरिक साझेदारी है जो दोनों के लिए अहम है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ''जापान के साथ वार्षिक सम्मेलन की परम्परा का बेहतरीन परिणाम सामने आया है। इससे दोनों देशों के व्यापक और बहुआयामी संबंधों को और मजबूती मिली है।''

उन्होंने कहा, ''भारत और जापान के बीच मजबूत हो रही सामरिक और वैश्विक साझेदारी को दोनों देशों के राजनीतिक वर्ग का भी पूरा समर्थन प्राप्त है। दोनों देशों के रिश्ते एशिया में शांति, समृद्धि और स्थिरिता के लिए महत्वपूर्ण हैं।''

सिंह ने कहा, ''जापान के साथ हमारा व्यापारिक संबंध नए दौर में पहुंचने को तैयार है। जापान हमारा बड़ा आर्थिक और सामरिक साझेदार है। भारत के आधारभूत ढांचे में हुए सुधार में जापान के सहयोग की अहम भूमिका है।''

जापान के साथ प्रधानमंत्री मलेशिया दौरे को महत्वपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा, ''मैं मलेशियाई प्रधानमंत्री के साथ परस्पर समझ की दिशा में पहल करूंगा ताकि दोनों के बीच रिश्ते को और मजबूती मिल सके।''

प्रधानमंत्री का वियतनाम दौरा भी काफी अहम है। सिंह हनोई में वियतनाम, चीन, दक्षिण कोरिया, आस्ट्रेलिया और सिंगापुर के नेताओं के साथ द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि आसियान देशों के साथ संबंधों को प्रगाढ़ बनाने की दिशा में वह इन देशों के नेताओं से चर्चा करेंगे।

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