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तेजी में भी हैं निवेश के मौके

भारतीय शेयर बाजार में एफआईआई की खरीदारी की वजह से सेंसेक्स में दो साल के बाद जबरदस्त उछाल आया है, हम आशा करते हैं कि यह तेजी बाजार में अपने समय की अधिकतम ऊंचाइयों को प्राप्त करेगी। 20 अक्टूबर 2010 तक इस वर्ष एफआईआई का निवेश अपने अधिकतम 109190 करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच चुका है। यह किसी भी कैलेंडर वर्ष में सर्वाधिक निवेश है।

भारतीय अर्थव्यवस्था ने मंदी के बाद भी दृढ़तापूर्वक, तेजी एवं मजबूती से विकास किया है। वर्तमान में भारत सरकार की सबके बड़ी चिंता मुद्रास्फीति की बढ़ती हुई दर है। इस वृद्धि को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक आगामी 2 नवम्बर की समीक्षा बैठक में अपने दरों में प्रधान वृद्धि कर सकता है। रिजर्व बैंक चालू वित्त वर्ष में यह वृद्धि 5 बार कर चुका है।

भारतीय शेयर बाजार में खरीदारी को लेकर काफी उत्साह है। लेकिन निवेशकों के समक्ष दुविधा है कि शेयर बाजार की इस तेजी के दौरान शेयर में निवेश करना कितना सही है? पिछले कुछ ट्रेडिंग सत्रों के दौरान एफआईआई की बिकवाली की वजह से शेयर बाजार में थोड़ी-सी गिरावट भी दिखी है। लेकिन यह सिर्फ कोल इंडिया के आईपीओ की वजह से हुआ था। कोल इंडिया आईपीओ 15.28 गुना सब्सक्राइब हुआ है जिसमें एफआईआई का योगदान 17.4 गुना है।

वैसे यह फायदा कमाने का मुफीद समय है। प्रमुख आई.टी. कंपनियां इनफोसिस, विप्रो और टी.सी.एस. ने अपने परिणाम घोषित कर चुके हैं, और यह परिणाम मिश्रित रहे हैं। अभी भी कई बड़ी कंपनियों के परिणाम आने बाकी हैं।

निवेश की रणनीति
हम उम्मीद करते हैं कि बाजार उच्च दरों पर ट्रेड हों पर खरीदने के लिए संभावनाएं अभी शेष हैं। अभी कई कंपनियों के परिणाम आने बाकी हैं, इसलिए हमें सिर्फ वही स्टॉक खरीदने चाहिए जिनके तिमाही परिणाम अच्छे हैं।

इसके अतिरिक्त हम उन स्टाक्स को भी चुन सकते हैं जो कि मूल रूप से मजबूत हैं। अभी भी कुछ ऐसे सेक्टर्स हैं जिनमें इतनी वृद्धि नहीं देखी गई है। हम इन्हें लंबी अवधि के लिए चुन सकते हैं जैसे बैंकिंग, ऑटो, सीमेंट और मेटल सेक्टर को लंबे समय तक निवेश के लिए चुनना ठीक रहेगा।

इस दृष्टिकोण से बैंकिंग सेक्टर अद्भुत है जैसे पी.एस.यू. बैंकिंग स्टॉक्स, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक और पंजाब नेशनल बैंक इत्यादि।

शार्ट टर्म/पोजिशनल निवेशक उन स्टॉक्स को खरीद सकते हैं जिन कंपनियों के परिणाम अच्छे आने की संभावना है। परंतु यह स्टॉक उनके परिणाम आने के दो-तीन दिन पहले खरीदने चाहिए क्योंकि स्टॉक्स के रेट परिणाम आने से पहले बढ़ते हैं। फिर इनमें गिरावट भी आ सकती है।

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