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भारतीय क्रिकेट का एंग्री यंगमैन

विराट कोहली को अब तक सभी एक बेहतरीन स्टेपनी के रूप में जानते थे। सचिन या युवराज की एक अच्छी स्टेपनी। जिस का खेलना इस बात पर निर्भर होता था कि टीम में कोई अनफिट तो नहीं है। लेकिन अब विराट कोहली ने अपने इस रोल को बदलकर रख दिया है। विराट कोहली ने हाल ही में आस्ट्रेलिया के खिलाफ 121 गेंदों पर 118 रनों का पहाड़ खड़ा करने के बाद ‘ट्विट्टर’ पर लिखा था- ‘ग्लैड विथ टीम्स विन, ग्रेट बैटिंग बाय युवी पाजी ऐंड सुरेश रैना। मेमोरेबल गेम फॉर मी।’
 
भारत की यह जीत ऐसी है, जिसके बारे में जब भी चर्चा होगी, विराट कोहली की बात भी होगी। विराट कोहली का क्रिकेट में आना और खेलना हमेशा संघर्षपूर्ण रहा है। क्रिकेट की दुनिया में उन्होंने लगातार झटके खाए हैं। विराट अपने हौसलों से उन झटकों को मात देते रहे और आज वे ऐसे मुकाम पर हैं जहां से वे ज्यादा कद्दावर खिलाड़ी बनकर सामने आये हैं।
 
वह 2006 का दिसंबर था और दिल्ली के कोटला स्टेडियम में वे दिल्ली टीम की तरफ से रणजी ट्राफी के लिए कर्नाटक के खिलाफ खेल रहे थे। बुरी खबर थी कि उनके पिता प्रेम कोहली का 54 साल की उम्र में हार्ट अटैक से निधन हो गया था.. सभी को लग रहा था कि आज शायद विराट की परीक्षा है, पूरी टीम शोक व्यक्त कर चुकी थी और यह जांबाज खिलाडी अड़ा था कि मैं बैटिंग करूंगा। विराट ने उस दिन 90 रन बनाकर दिल्ली  की टीम को जिताया।

विराट कोहली ने अंडर 17, अंडर 19 और इमर्जिंग प्लेयर्स टूर्नामेंट्स में अपनी क्षमता का लोहा मनवाया है। अब वन डे मैचों में उन्हें अपनी योग्यता दिखाने का अवसर मिला है। आंकड़ों की बात की जाए तो उनका प्रदर्शन हमेशा शेयर बाजार के ग्राफ जैसा रहा है -अकसर ऊपर-नीचे होने वाला। जैसे शेयर बाजार अब जाकर 20,000 के आसपास टिका है, कुछ वैसा ही हाल विराट कोहली का भी है।

आईपीएल के फर्स्ट सीजन में वे फ्लाप रहे। तेरह इनिंग में 165 रन। सेकेंड सीजन की 11 इनिंग में केवल 215 रन। आइडिया कप वन डे में सचिन और सहवाग के चोटिल होने पर मौका मिला और ओपनिंग की तो केवल 12 रन पर आउट। सीरिज के दूसरे मैच में उन्होंने 37 रन बनाये और फिर चौथे मैच तक आते आते निर्णायक 54 रन बना लिए।

यह वन डे मैचों में श्रीलंका के खिलाफ श्रीलंका में भारत की पहली जीत थी.. भाग्य की बात यह थी कि वे भारत में हो रहे वन डे में श्रीलंका के खिलाफ मैचों में चुने तो गए, पर खेल नहीं सके, क्योंकि सचिन और सहवाग फिट हो चुके थे।

विराट कोहली युवा खिलाड़ियों में अपनी खास पहचान बना चुके हैं। उन्हें अभी मीलों का सफर तय करना है, उनमें अपार संभावना की बात कही जा रही है। कई लोग उनमें सचिन की छवि देखते हैं। खेल के प्रति उनकी प्रतिबद्धता वास्तव में सराहनीय है।            

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