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आतंकवाद का मुंहतोड़ जवाब देने को तैयार भारत-रूस

आतंकवाद से लड़ने को भारत और रूस तैयार हैं। दोनों देशों की सेनाओं ने रानीखेत में युद्धाभ्यास कर आतंकवाद से मुकाबला करने की बारीकियां सीखीं। अपनी तकनीक, रणनीति और उपकरणों को परखा। रानीखेत के पास कुमाऊं की पहाड़ियों में आधुनिक तकनीक, हाईटेक सर्विलांस और मैन पावर के साथ दोनों देशों ने दस दिन तक अभ्यास किया। इसमें भारत की ओर से एक इंफैंट्री बटालियन और रूस की मोटराइज्ड बटालियन ने हिस्सा लिया। यह जानकारी बरेली स्थित उत्तर भारत एरिया मुख्यालय से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में दी गई।


विज्ञप्ति के जरिए यूबी एरिया के अधिकारियों ने बताया कि उत्तराखंड के कुमाऊं में भारत और रूस की सेनाओं का संयुक्त युद्धाभ्यास चल रहा है। इसे इंद्र-2010 नाम दिया गया। आतंकवाद और गृहयुद्ध से निपटने में सक्षम बनाने के लिए दोनों देशों की सेनाएं दस दिनों से अभ्यास कर रही हैं। भारत की इंफैंट्री बटालियन और रूस की मोटराइज्ड बटालियन ने दुर्गम क्षेत्रों में आधुनिक हथियारों और तकनीक के साथ लड़ाई का अभ्यास किया। युद्धाभ्यास ऐसे स्थान पर हुआ, जहां की परिस्थितियां दोनों देशों में आतंक प्रभावित क्षेत्रों की हैं। बात चाहे चेचेन्या की हो या भारत में नक्सल और आतंक प्रभावित क्षेत्रों की। इस अभ्यास के माध्यम से दोनों देशों की सेनाओं ने अपने युद्ध अनुभव, रणनीति और तकनीक का आदान-प्रदान किया। रूसी सेना भारतीय सेना के युद्ध तरीकों से खासी प्रभावित हुई।

इस क्रम का तीसरा युद्धाभ्यास
भारत-रूस के बीच ‘इंद्र’ नाम से यह तीसरा युद्धाभ्यास है। पहला इंद्र-05 आगरा में हुआ और दूसरा इंद्र-07 पोस्को रूस में आयोजित किया गया। पहले दो युद्धाभ्यास हवाई हमलों से सुरक्षा के लिए किए गए। लेकिन पहली बार आतंकवाद और आंतरिक अशांति से निपटने के लिए दोनों देशों ने युद्धाभ्यास किया। इसमें दोनों देशों की सेनाओं के बड़ी संख्या में अफसरों और जवानों ने हिस्सा लिया।

छोटी टीम के साथ हमले की रणनीति
युद्धाभ्यास के अंतिम दो दिन दोनों देशों ने छोटी टीमों के तौर पर लड़ाई का अभ्यास किया। संयुक्त अभ्यास में सेनाओं ने सर्विलांस, खुफिया जानकारी जुटाना जैसे सामरिक रणनीति पर काम किया। लड़ाई के दौरान एक साथ कई मोर्चो पर छोटे-छोटे ग्रुप में हमला करने पर खास जोर रहा। आतंकियों को उनके सुरक्षित ठिकानों से निकालना भी अभ्यास का एक अहम हिस्सा रहा।

अफसरों ने देखी सेनाओं की ताकत
भारत में रूस के राजदूत एलेक्जेंडर एम कदाकिन भी अंतिम दिन सैन्य युद्धाभ्यास देखने पहुंचे। साथ ही सेंट्रल कमांड के जीओसी इन सी लेफ्टिनेंट जनरल वीके अहलूवालिया, रूसी दूतावास के चीफ रूसी मिलिट्री स्पेशलिस्ट लेफ्टिनेंट जनरल सोबुलेव विक्टर इवानोविक भी मौजूद रहे।

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